जयपुर। घरेलू एयरलाइनों में बार.बार होने वाली तकनीकी खराबी पर आज उड्डन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उस पहलू में कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इस साल ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनमें विमानों को या तो अपने मूल स्टेशन पर वापस जाने के लिए मजबूर हुए रिस्क के साथ अपने गंतव्य स्थान पर पहंुंचे हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने एक ब्रीफिंग में कहा हमने निर्णायक कार्रवाई की है। नियामक डीजीसीए ने स्पॉट चेक और ऑडिट किया है और कई कार्रवाई की गई है।
उड्डयन मंत्री ने गुरुवार को एक लिखित उत्तर में लोकसभा को सूचित किया। पिछले एक साल . जुलाई 2021 . जून 2022 में कुल विमानों में तकनीकी खराबी की सूचना मिली है।
बता दें कि विमानों में तकनीकी खराबियों के चलते डीजीसीए ने बुधवार को स्पाइसजेट को आदेश दिया कि वह आठ सप्ताह के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत उड़ानें संचालित करे।
एएनआई से बात करते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय डीजीसी के महानिदेशक अरुण कुमार ने गुरुवार को कहा कि विमान प्रणाली काफी मजबूत हैं, लेकिन कंपोनेंट की खराबी का मतलब यह नहीं है कि यह यात्रियों की सुरक्षा से समझौता कर रहा है।
नागरिक उड्डयन नियामक के प्रमुख ने कहा हमें अपने पायलटों पर बेहद गर्व है जो उचित क्षमता के साथ कभी.कभार होने वाली गड़बड़ियों को दूर करते हैं। यह पूछे जाने पर कि इस तरह के बैक-टू-बैक तकनीकी खराबी का प्रमुख कारण क्या था और क्या नियामक को इस पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया गया है कि इसने यात्रियों की सुरक्षा से कितना समझौता किया ? इस सवाल का जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि, अपेक्षित रखरखाव कार्यों के बावजूद कोई घटक विफलता होना अवैज्ञानिक होता है।