जयपुर। उद्धव ठाकरे द्वारा सोमवार को मुंबई में उनके आवास पर बुलाई गई एक बैठक में भाग लेने वाले शिवसेना के कई सांसदों ने उनसे राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने और भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट के साथ संभावित सुलह का दरवाजा खोलने का अनुरोध किया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर फैसला "एक या दो दिन में" किया जाएगा और ठाकरे मुर्मू का समर्थन करने के अनुरोध पर "सकारात्मक" लग रहे थे। सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र से पार्टी के 18 लोकसभा सांसदों में से 13 और उसके तीन राज्यसभा सांसदों में से दो ने मातोश्री में हुई बैठक में भाग लिया। सूत्रों के मुताबिक उनमें से कम से कम आठ ने मुर्मू की उम्मीदवारी और भाजपा और शिंदे गुट के साथ संभावित “पैच-अप” का समर्थन किया।
शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने बताया कि “शिवसेना और भाजपा के बीच कड़वाहट थी, और विद्रोह ने इसे बढ़ा दिया। लेकिन अगर पार्टी मुर्मू को समर्थन देती है, तो सुलह का दरवाजा खुल जाएगा और एक बार फिर से समझौता करने और संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिलेगा।
सूत्रों ने बताया कि शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे, ईडी की जांच के दायरे में आने वाली भावना गवली, संजय जाधव, संजय मांडलिक और हेमंत पाटिल समेत पांच सांसद मौजूद नहीं थे। दादरा और नगर हवेली से शिवसेना की अकेली सांसद कलाबेन डेलकर भी मौजूद नहीं थीं।
शिवसेना के पदाधिकारियों के अनुसार, जाधव, मांडलिक और पाटिल ने बाद में ठाकरे खेमे को बताया कि वे "कुछ मुद्दों" के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, जिसमें "अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में भारी बारिश और व्यक्तिगत कारणों" शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि बैठक के बाद पाटिल ने ठाकरे से मुलाकात की।