संवाददाता सुमेर सिंह राव
उदयपुरवाटी l
समाजसेवी मदन लाल भावरिया की 75 वर्ष की आयु में रोज 10 किलोमीटर की पदयात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक
जीव दया से बड़ा कोई दूसरा धर्म नहीं है........ भावरिया
उपखंड क्षेत्र के पचलंगी गांव के समाजसेवी मदन लाल भावरिया मातेश्वरी धाम पर रोज प्रातः 6:00 बजे कबूतरों के लिए दाना लेकर पिछले 21 वर्षों से कबूतरों की सेवा में समर्पित है l जीव दया परोपकार का एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने इस लोक को ही नहीं परलोक को भी सुधार सकता है l मानव का सबसे बड़ा धर्म जीव रक्षा ही है l हम सभी को जीवो की रक्षा करनी चाहिए आज के समय में हर कोई भगवान को प्रसन्न और उनकी कृपा पाने के लिए पूजा पाठ करता है लेकिन भावरिया ऐसे व्यक्तित्व के धनी है जो प्रतिदिन यज्ञ एवं जीव कल्याण का कार्य करते हैं l शास्त्रों में कबूतरों को शांति का प्रतीक माना गया है कबूतर माता लक्ष्मी के भक्त होते हैं l घर में कबूतरों का वास होने से घर में लक्ष्मी की वर्दी होती है साथ ही सुख शांति में भी वृद्धि होती है l समाजसेवी भावरिया ने हमारे उदयपुरवाटी संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 21 वर्षों में ग्यारह 108 कुंडीय महायज्ञ का कुशल प्रबंधन किया 21 से अधिक नौ कुंडीय महायज्ञ में उनकी सेवा परायणता देखी गई l व सदैव समाज सेवा एवं मानव कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं उनकी सादगी एवं नशा मुक्त जीवन 75 वर्ष की आयु में रोज 10 किलोमीटर की पदयात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक है l समाजसेवी मदन लाल भावरिया 75 वर्ष की उम्र में भी सुबह 6:00 बजे घर से निकल कर 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर लेते हैं l