Som Pradosh Vrat : आज है मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत, जानिए प्रदोष व्रत का महत्व

द्वादशी तिथि आज सुबह 10 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। आप सभी जानते ही हैं कि कृष्ण और शुक्ल का प्रदोष व्रत और त्रयोदशी हर महीने के पखवाड़े में मनाया जाता है. सप्ताह के सातों दिनों में जिस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है, उसी के नाम पर इस प्रदोष का नाम रखा जाता है। ऐसे में आज सोम प्रदोष व्रत है। आपको बता दें कि सभी प्रदोष व्रतों में प्रदोष काल का बहुत महत्व होता है। त्रयोदशी आज रात के समय रहेगी, इसलिए प्रदोष व्रत आज ही के दिन किया जाएगा।

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए। जो इस दिन भगवान शिव की पूजा करता है और प्रदोष व्रत करता है, उसे सभी पापों से छुटकारा और धर्म की प्राप्ति होती है। साथ ही उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। रात के पहले घंटे यानी सूर्योदय के बाद की शाम को प्रदोष काल कहा जाता है। हेमाद्री के व्रत खंड-2 में, पृष्ठ 18 पर, भविष्य पुराण से यह उद्धृत किया गया है कि जो व्यक्ति त्रयोदशी की रात के पहले भाग के दौरान शिव की मूर्ति के पास प्रसाद के साथ जाता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है। इसलिए इस दिन और रात के पहले पहर में भगवान शिव को चीजें अर्पित की जाएंगी। इसके साथ ही प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के लिए कुछ विशेष करने से आपको अच्छे फल की प्राप्ति होगी.

प्रदोष व्रत के दिन करें ये उपाय

गंगा जल और दूध को स्वच्छ जल में डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

सोम प्रदोष के दिन सवा किलो साबुत चावल लें। इनमें से कुछ चावल शिव मंदिर में चढ़ाएं और बाकी चावलों को किसी जरूरतमंद में बांट दें।

महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥) का 11 बार जाप करें।

बालू, राख, गुड़ और मक्खन मिलाकर शिवलिंग बनाएं और उसका विधि-विधान से पूजन करें। 

आज शिवलिंग पर ‘ऊँ नमः शिवाय’ बोलते हुए धतूरा चढ़ाएं।