सेंट जोसेफ स्टडी अब्रोड सेे कॅरियर सिटी कोटा की उड़ान को लगेंगे पंख

ब्यूरो चीफ शिवकुमार शर्मा
कोटा राजस्थान

सेंट जोसेफ स्टडी अब्रोड सेे कॅरियर सिटी कोटा की उड़ान को लगेंगे पंख

  • पहली बार विदेश की यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर व डीन सीधे विद्यार्थियों और अभिभावकों से मिले
  • सेंट जोसेफ स्टडी अब्रोड की सेमिनार,

विदेशों में पढ़ाई को लेकर राह होगी आसान

कोटा 28 अगस्त। कोचिंग सिटी कोटा अब तक विद्यार्थियों को मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए तैयारी करवाकर कॅरियर बना रहा है। अब कोटा में पढ़ने आ रहे हजारों स्टूडेंट्स की सफलता का प्रतिशत और अधिक बढ़ने वाला है। यहां आने वाले विद्यार्थियों को और अधिक बेहतर अवसर मिलने वाले हैंं। कॅरियर सिटी कोटा की उड़ान को यह पंख देने की पहल की है सेंट जोसेफ गु्रप के सेंट जोसेफ स्टडी अब्रोड विभाग ने। इस संबंध में एक सेमिनार रविवार को होटल ग्रांड चंडीराम में आयोजित किया।
सेंट जोसेफ गु्रप के चेयरमैन डॉ.अजय शर्मा ने बताया कि कोटा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी विदेशी विश्वविद्यालय के कुलपति और डीन स्तर के अधिकारी कोटा आएं हों और उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से सीधे संवाद किया हो।

इस सेमिनार में फोरेन मेडिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर फॉर इंटरनेशनल कॉपरेशन बुलकिन स्टीफन और डीन डानेकियाना नाटयाला मुख्य वक्ता रहे। यहां बड़ी संख्या में मौजूद विद्यार्थियों और अभिभावकों ने दोनों खुला संवाद किया। उनके सवालों के जवाब दिए और विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई के बारे में विस्तार से बताया। भारतीय मेडिकल एजुकेशन और यहां की परिस्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया। डॉ.शर्मा ने बताया कि आज विदेशों में मेडिकल के साथ-साथ इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्सेज के लिए भी कई अवसर हैं। वहीं एविएशन के भी कोर्सेज भी आॅफर्स होते हैं। जहां लाइसेंस के साथ अफ्रीका और कनाडा जैसे देशों में जॉब प्लेसमेंट की गारंटी भी होती है। इसके अलावा कई कोर्सेज जैसे मैनेजमेंट, रिसर्च आदि में 100 पर्सेन्ट तक स्कॉलरशिप भी आॅफर की जाती है। ये सभी अवसर इस सेमिनार के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों को बताए गए।

स्टीफन ने बताया कि भारत में होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में इस वर्ष 18 लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें से सिर्फ करीब एक लाख विद्यार्थी ही ऐसे होते हैं जो सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस या बीडीएस कॉलेजों में प्रवेश ले पाते हैं। कुछ अंकों से ही लाखों प्रतिभावान विद्यार्थी पिछड़ जाते हैं और उनके सामने विकल्प कम रह जाते हैं।

ऐसी स्थिति में उन्हें या तो फिर से तैयारी कर एक साल बिगाड़ना पड़ता है या फिर कॅरियर से समझौता करना पड़ता है। इन दोनों परिस्थितियों से बेहतर फॉरेन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई है जो कि भारतीय प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई से सस्ती भी है। फॉरेन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर पर भी भारतीय मेडिकल कॉलेजों की तरह रखा जाता है। फॉरेन में एमबीबीएस करने के बाद भारत लौटकर प्रेक्टिस के लिए मेडिकल कौंसिल आॅफ इंडिया की परीक्षा देकर उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत भी लगातार बढ़ता जा रहा है। 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो इन परीक्षाओं में पास होते हैं।

फीस की बात करें तो भारत में एमबीबीएस करने के लिए विद्यार्थियों को 70 लाख से एक करोड़ रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि विदेश में एमबीबीएस करने का खर्च 15 से 20 लाख ही होता है। ऐसे में लाखों विद्यार्थी क्यों साल खराब करें, क्यों वे अपने कॅरियर से समझौता करें, ऐसे विद्यार्थियों के लिए विकल्प लेकर ही सेंट जोसेफ स्टडी अब्रोड ने यह पहल की है।

डॉ.अजय शर्मा ने बताया कि सेंट जोसेफ ऐसे स्टूडेंट्स को सीधे फॉरेन यूनिवर्सिटीज से जोड़ेगा ताकि वे अपना कॅरियर बना सकें और भारत में चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में हो रही चिकित्सकों की कमी को दूर कर सकें। यदि डॉक्टर्स की संख्या बढ़ेगी तो भारत के हर क्षेत्र में हर गांव में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य मिल सकेगा और हम विकसित भारत बनने की तरफ आगे बढ़ सकेंगे।