जयपुर। लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। दरअलस लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल की सिफारिश पर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं करने पर उत्तर प्रदेश प्रशासन से सवाल पूछे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा, “निगरानी न्यायाधीश की रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने जमानत रद्द करने की सिफारिश की थी और सिफारिश की थी कि इसके लिए एक आवेदन दायर किया जाए। ऐसा क्यों नहीं किया गया?” साथ ही सीजेाआई ने कहा कि एसआईटी ने मुख्य सचिव (गृह) को पत्र लिखकर जमानत रद्द करने की सिफारिश की थी फिर भी ऐसा क्यूं नहीं हुआ
सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर यूपी सरकार के वकील ने कहा, 'मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैंने रिपोर्ट नहीं देखी है और न ही निर्देश देने वाले स्थायी वकील ने इसे देखा है।” साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के कार्यालय को एसआईटी या निगरानी न्यायाधीश से सिफारिश पत्र नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार से 22 फरवरी को निगरानी न्यायाधीश द्वारा दायर रिपोर्ट की एक प्रति सरकार के वकील और याचिकाकर्ताओं दोनों को उपलब्ध कराने को कहा। आशीष मिश्रा की ओर से पेश महेश जेठमलानी ने भी एक प्रति मांगी। उन्होंने अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित करने का भी आग्रह किया। CJI रमना ने अनुरोध स्वीकार कर लिया।
बता दें कि आशीष मिश्रा को पिछले साल 9 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। 3 अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी।