ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तारी एवं अन्य कई शक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकार रखा

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट में आज ईडी का सपोर्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय का समर्थन करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने जांच शुरू करने, गिरफ्तारी करने की शक्ति और अन्य सहित कई शक्तियों के संबंध में जांच एजेंसी के खिलाफ उठाई गई लगभग सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। आइये बताते कोर्ट ने ईडी सपोर्ट में क्या क्या तर्क दिये हैं।

याचिकाकर्ता की याचिका का खारिज करते हुए हुए शीर्ष अदालत ने अपराध, तलाशी और जब्ती, गिरफ्तारी की शक्ति, संपत्तियों की कुर्की और जमानत की कार्यवाही में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के लगभग सभी कड़े प्रावधानों को बरकरार रखा है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि गिरफ्तारी के आधार या सबूत के बिना आरोपी को गिरफ्तार करने की अनियंत्रित शक्ति असंवैधानिक है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ईडी ने पूछताछ के दौरान एक आरोपी के बयान दर्ज करने की धमकी के तहत सूचना छिपाने के लिए जुर्माना लगाने की धमकी दी है।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं की चुनौती को खारिज करते हुए कहा कि यह एक प्राथमिकी के समान है और आरोपी की एक प्रति का हकदार है, हर मामले में ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) प्रति की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है क्योंकि यह एक आंतरिक दस्तावेज है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरोपी पर सबूत का बोझ डालना समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के प्रतिनिधित्व वाले केंद्र ने यह कहते हुए जवाब दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों की गंभीर प्रकृति और इस पर अंकुश लगाने की सामाजिक आवश्यकता के कारण, आरोपी पर सबूत का बोझ डालना उचित है।

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट में आज ईडी का सपोर्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय का समर्थन करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने जांच शुरू करने, गिरफ्तारी करने की शक्ति और अन्य सहित कई शक्तियों के संबंध में जांच एजेंसी के खिलाफ उठाई गई लगभग सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। आइये बताते कोर्ट ने ईडी सपोर्ट में क्या क्या तर्क दिये हैं।

याचिकाकर्ता की याचिका का खारिज करते हुए हुए शीर्ष अदालत ने अपराध, तलाशी और जब्ती, गिरफ्तारी की शक्ति, संपत्तियों की कुर्की और जमानत की कार्यवाही में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के लगभग सभी कड़े प्रावधानों को बरकरार रखा है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि गिरफ्तारी के आधार या सबूत के बिना आरोपी को गिरफ्तार करने की अनियंत्रित शक्ति असंवैधानिक है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ईडी ने पूछताछ के दौरान एक आरोपी के बयान दर्ज करने की धमकी के तहत सूचना छिपाने के लिए जुर्माना लगाने की धमकी दी है।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं की चुनौती को खारिज करते हुए कहा कि यह एक प्राथमिकी के समान है और आरोपी की एक प्रति का हकदार है, हर मामले में ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) प्रति की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है क्योंकि यह एक आंतरिक दस्तावेज है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरोपी पर सबूत का बोझ डालना समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के प्रतिनिधित्व वाले केंद्र ने यह कहते हुए जवाब दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों की गंभीर प्रकृति और इस पर अंकुश लगाने की सामाजिक आवश्यकता के कारण, आरोपी पर सबूत का बोझ डालना उचित है।