कोटा (संवाददाता शिवकुमार शर्मा) स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की संभागीय प्रशासनिक समिति की प्रथम त्रैमासिक बैठक संभागीय आयुक्त कैलाश चन्द मीणा की अध्यक्षता में गुरूवार को सीएडी सभागार में आयोजित की गई।
संभागीय आयुक्त ने स्थानीय निकाय की संस्थाओं में भारी संख्या में बकाया आक्षेपों को गम्भीरता से लेते हुए कहा कि नियंत्रण अधिकारी प्रत्येक शनिवार को अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक लेकर पालना रिपोर्ट बनवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने उपनिदेशक स्थानीय निकाय विभाग, नगर निगम दक्षिण एवं उत्तर को निर्देशित किया कि तिथि एवं समय नियत कर समस्त नगर परिषदों के आयुक्त एवं अधिकारी, नगर पालिका मय लेखाकर्मी के साथ आक्षेप निस्तारण के लिए बैठक आयोजित करें। उन्होंने कहा कि जिला परिषदें विशेष अभियान चलाकर ग्राम पंचायत वार ऑडिट पैराओं का विश्लेषण कर समयबद्ध निस्तारण करें। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता से संबन्धित प्रकरणों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी व्यक्तिशः जांचकर वसूली के साथ विधिक कार्यवाही भी समय पर करें।
संभागीय आयुक्त ने सभी विभागों को वित्तीय अनियमितता के मामलों में वास्तविक दोषी की पहचान कर प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी विभाग इस वित्तीय वर्ष में दर्ज प्रकरणों का 40 प्रतिशत निस्तारण किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरण जिनमें बहुत अधिक समय हो गया है तथा योजना बन्द हो गई है अथवा अनियमितता के दोषी व्यक्ति अब जीवित नहीं है उनका विवरण बनाकर प्रकरण ड्रोप करने के लिए भिजवाये। संस्था में बकाया आक्षेपों यथा सामान्य प्रकृति, वसूली, गबन, प्रक्रियाओ का उल्लघंन, अनियमितताओं आदि के मध्य नजर वर्गीकरण किया जाकर आक्षेपों के निस्तारण के लिए प्रभावी कार्य करें।
उन्होंने नगर पालिका मांगरोल में आवासन मंडल का भूमि आवंटन में राशि जमा नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में उपनिदेशक स्थानीय निकाय विभाग एवं उप आवासन आयुक्त आवासन मण्डल को 30 जुलाई को मौके पर उप जिला कलक्टर मांगरोल, तहसीलदार एवं सम्बन्धित पटवारी के साथ पहुंच कर प्रकरण की सम्पूर्ण वस्तुस्थिति ज्ञात कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। पंचायत समिति तालेडा में निर्मित दुकानों के किराया सम्बन्धी प्रकरण में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बून्दी को मौके पर पहुंच जांच कर वस्तुस्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिये। उन्होंने स्थानीय निकायों की सम्पत्तियों के किराया निर्धारण से सम्बन्धित ऑडिट पैराओं की जांच कर वसूली के साथ वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार किराया निर्धारण करने के निर्देश दिये।
अतिरिक्त निदेशक पूनम मेहता ने बताया कि संभागाधीन संस्थाओं में 78 हजार 530 सामान्य आक्षेप, 487 गंभीर आक्षेप एवं 958 गबन प्रकरणों की राशि 4.51 करोड बकाया है। उन्होंने कहा कि संस्थाधिकारी बकाया आक्षेपों का अवलोकन कर यह सुनिश्चित करें कि पायी गयी अनियमितताओं की पुनरावृति न हो। उन्होंने बताया कि गम्भीर प्रकृति के आक्षेप लम्बे समय तक बकाया रहने पर लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में सम्मिलित कर लिये जाते है अतः ऐसी स्थिति से बचने के लिए संस्थाधिकारी समय रहते आक्षेपों का निस्तारण करावें। उन्होंने कहा कि वर्ष 1953-56 तक के आक्षेप अनुपालनाओं के अभाव में बकाया है ऐसे आक्षेपों का निस्तारण संस्थाधिकारी प्राथमिकता से करें।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद झालावाड श्रीनिधि बीटी, आयुक्त नगर निगम उत्तर वासुदेव मालावत, दक्षिण कीर्ति राठौड़, अतिरिक्त जिला कलक्टर सीलिंग एसएन आमेठा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद कोटा ममता तिवाड़ी, बून्दी मुरलीधर प्रतिहार, उपनिदेशक स्थानीय निकाय दीप्ति मीना, कोषाधिकारी डॉ. विधि शर्मा, राज्य कृृषि विपणन बोर्ड के अधीक्षण अभियन्ता एसबी गुप्ता, उप आवासन आयुक्त आरके जैन, संयुक्त निदेशक कृषि विपणन विभाग हरिशरण मिश्रा, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि सहित संभाग के सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।