जयपुर। पंजाबी गायक सिद्धू मूस वाला की हत्या के बाद अब आप पंजाब और हाईकोर्ट ने भगवंत मान सरकार को एक नोटिस जारी किया है। नोटिस में हाईकोर्ट ने यह जानने की मांग की गई थी कि जिन लोगों की सुरक्षा वापस ले ली गई है या कम कर दी गई है, उनके नाम सार्वजनिक डोमेन में क्यों आए।
न्यायमूर्ति राज मोहन सिंह की पीठ ने भगवंत मान सरकार से यह भी बताने को कहा कि किस आधार पर उसने मूस वाला सहित 400 से अधिक लोगों के सुरक्षा कवर को वापस लेने या कम करने का फैसला किया। न्यायमूर्ति सिंह ने राज्य सरकार को दो जून तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि अदालत, पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 11 मई को उनकी सुरक्षा को "जेड" श्रेणी से हटाने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि ऐसे संवेदनशील निर्णयों को प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए, जिससे पीठ को आदेश पारित करने के लिए प्रेरित किया।
बता दें कि इस साल पंजाब राज्य में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मूस वाला की सुरक्षा में कटौती के एक दिन बाद रविवार शाम को गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिसके बाद उनकी सुरक्षा को कम करने से एक बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है, विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर वीआईपी को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार को भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक पोस्टर साझा करने के लिए फटकार लगाई गई थी, जबकि 424 व्यक्तियों के सुरक्षा कवर को कम करने के अपने फैसले की घोषणा की गई थी। पोस्टर में मूस वाला के नाम का जिक्र था।