संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा |
एक ही दिन में वाट्सएप पर ली नकलें और कर दिया गरीब के साथ न्याय
प्रशासन गांव के संग अभियान आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रहे है, घर बैठे वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण एक ही दिवस में होने से शिविरों के प्रति ग्रामीणों का उत्साह बढता जा रहा है।
अभियान के तहत कनवास के ग्राम पंचायत बालूहेड़ा में आयोजित शिविर में बजरंगलाल कीर की 31 वर्षो से चली आ रही समस्या का मौके पर निराकरण हुआ तो आंखों से खुशी के आंशु निकल आये। बजरंगलाल के पिताजी चतरा के नाम ग्राम पालाहेड़ा में खसरा नबंर 539 रकबा 0.16 हैक्टयर भूमि दर्ज है जिसके राजस्व रिकार्ड में जाति कीर के स्थान पर सहवन से बैरवा दर्ज हो गई थी। बजरंगलाल के पिताजी की मृत्यु 23 वर्ष तथा माताजी ग्यारसीबाई की मृत्यु 11 वर्ष पूर्व हो चुकी है। राजस्व रिकार्ड में कीर के स्थान पर बैरवा जाति होने से राजस्व रिकॉर्ड में उनके स्थान पर वारिसान का नाम दर्ज नहीं किया गया है। जिसके कारण प्रार्थीगण को कृषि विकास कार्य करवाने, राज्य सरकार की योजनाओं के लाभ लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा था। प्रार्थी द्वारा तहसील कार्यालय कनवास में भी कई बार चक्कर काटे लेकिन राजस्व रिकार्ड में पिताजी की जाति बैरवा है व मृत्यु प्रमाण पत्र में पिताजी की जाति कीर दर्ज होने के कारण जाति परिवर्तन के लिए वांछित दस्तावेज सहित सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर अनुतोष प्राप्त करने का सुझाव दिया गया।
प्रकरण में शिविर प्रभारी उपखण्ड अधिकारी कनवास राजेश डागा ने भू.अभि.निरीक्षक व पटवारी से जानकारी ली तो पटवारी ने बताया कि ग्राम पालाहेडा के खसरा नबंर 539 की रकबा 1 बीघा भूमि चतरा पुत्र रत्तीराम जाति बैरवा के नाम दर्ज है। जिला रिकार्ड रूम से पुराने रिकार्ड की प्रतिलिपी प्राप्त करने के पश्चात ही कार्यवाही की जा सकती है। शिविर प्रभारी अधिकारी उपखण्ड अधिकारी डागा ने मौके पर ही जिला कार्यालय में भूअभिलेख निरीक्षक रिकॉर्ड रूम कोटा से दूरभाष पर सम्पर्क कर रिकार्ड रूम से तत्समय की नकलें वॉट्सएप पर प्राप्त की।
जिला रिकार्ड रूम से प्राप्त नामान्तरण संख्या 989 तिथि 30 मई 1982 में चतरा पुत्र रत्तीराम जाति कीर के नाम से 1 बीघा भूमि आवंटन दर्ज पाई गई। उसके बाद बनी एक जमाबंदी में उनकी जाति सही दर्ज रही, किन्तु उसके पश्चात की समस्त जमाबंदियों में चतरा की जाति कीर के स्थान पर बैरवा दर्ज पाई गई।
शिविर प्रभारी अधिकारी ने शिविर में ही प्रार्थी के पिताजी के राजस्व रिकार्ड के खाते में जाति दुरूस्त कराने वास्ते 136 एल.आर.एक्ट के अन्तर्गत पटवारी व भूअभिलेख निरीक्षक से प्रकरण तैयार करवाया गया। जिसके आधार पर तहसीलदार कनवास आमोद कुमार माथुर ने रिपोर्ट तैयार कर शिविर प्रभारी अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। उपखण्ड अधिकारी ने प्रार्थी के पिता की जाति राजस्व रिकार्ड मे बैरवा के स्थान कीर दर्ज करने के आदेश शिविर में ही जारी कर मृतक के वारिसान का नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए तहसीलदार को निर्देशित किया गया।
70 वर्षीय मुरली शंकर को मिला न्याय, वर्षों बाद पिता का नाम हुआ दुरूस्त
प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत ग्राम बालूहेडा में आयोजित शिविर में 70 वर्षीय मुरली शंकर पुत्र श्रवणलाल ब्राह्मण के पिता का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दुरूस्त कर 40 वर्षो से चली आ रही समस्या का घर बैठे निराकरण किया।
शिविर प्रभारी अधिकारी एसडीएम राजेश डागा को मुरली के पुत्र एवं पत्नि ने प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर अवगत कराया कि मुरली चलने फिरने में असहज है। ग्राम बालूहेडा के राजस्व रिकार्ड में मुरलीशंकर के पिताजी का नाम पिछले 40 वर्षों से मदनलाल दर्ज हो रहा है। जबकी अन्य सभी दस्तावेजों में श्रवणलाल है जिसका शुद्धिकरण के लिए उपखण्ड न्यायालय में वाद चल रहा है।
शिविर प्रभारी अधिकारी ने प्रार्थना-पत्र को पत्रावली के साथ संलग्न कर अन्तर्गत धारा 136 एल.आर.एक्ट के तहत भूअभिलेख निरीक्षक व पटवारी से तैयार करवाकर रिपोर्ट ली गई। शिविर के दौरान तहसीलदार कनवास आमोद माथुर द्वारा राजस्व रिकार्ड व प्रार्थी के अन्य दस्तावेजों का अवलोकन कर रिपोर्ट उपखण्ड अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। जिसमें प्रार्थी द्वारा दी गई जानकारी सत्य पाई गई।
उपखण्ड अधिकारी ने शिविर में ही प्रार्थी मुरलीशंकर के पिता का नाम श्रवणलाल दर्ज करने के आदेश जारी किये गये। इस प्रकार एक 70 वर्षीय बुजुर्ग काश्तकार के पिता का नाम राजस्व रिकार्ड में मदनलाल के स्थान पर श्रवण लाल दर्ज कर राजस्व रिकार्ड को दुरुस्त किया गया तथा शिविर का लाभ प्रार्थी को दिलाया गया।