संवाददाता गौतम के. गट्स
जोधपुर |
रविवार को प्रज्ञा संस्थान जोधपुर की ओर से मदन सावित्री डागा साहित्य भवन नेहरू पार्क में डॉक्टर नितेश व्यास के काव्य संग्रह *अंधेरे का उत्तराधिकारी"का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में प्रख्यात शायर आलोचक एवं चिंतक श्री शीन आफ निजाम विराजमान थे जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कला संकाय के पूर्व अधिष्ठाता एवं संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सत्य प्रकाश दुबे कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता थे अपने विशिष्ट वक्तव्य में प्रोफेसर एसपी दुबे ने काव्य साधना को समाधि का परिणाम बताते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास से कवि अपनी प्रतिभा और व्युत्पत्ति से अपनी वैखरी वाणी को कविता रूप में परिणत करता है प्रोफेसर दुबे ने नितेश व्यास की कविता अंधेरे का उत्तराधिकारी के प्रथम संबोधन पद और निशा की प्रयोग औचित्य की चर्चा करते हुए डॉक्टर नितेश व्यास के काव्य संग्रह में व्यक्त शब्द ब्रह्म एवं कविताओं के अंतस में व्याप्त दार्शनिकता को व्याख्यायित किया डॉक्टर नितेश व्यास ने अपनी काव्य साधना के मार्ग में प्रेरक अपने परिजनों गुरुजनों और सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ व्यास ने कुछ प्रतिनिधि रचनाऐं -धर्म का मूल,पिता,पुकार, शब्दों के पर ,ऊन के गोले ,अंतर काल ,नम सलवटे आदि के पाठ से श्रोताओं को उद्वेलित एवं आनन्दित किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं कवियत्री प्रोफेसर कैलाश कौशल ने अंधेरे का उत्तराधिकारी काव्य संग्रह को हिंदी साहित्य जगत में विशेष नवाचार बताया। कौशल ने कहा कि इस काव्य संग्रह की मनोभूमि एवं शब्द संयोजन कविता के प्रचलित मुहावरे से प्रथक है ।उनकी कविताओं में दृश्य के पीछे के अदृश्य को देखने की ललक है डॉक्टर नीतेश व्यास ने बिंबो, प्रतीकों को नए कलेवर में व्यापकता के साथ घड़ा है। इनकी कविताएं जीवन की व्यापक समष्टि से जीवन कोणों का परीक्षण करती है।डॉक्टर नीतेश व्यास की कविताओं का मूल स्वर है गूंज,गूंज उनकी कविताओं का बहु प्रयुक्त शब्द है जो उदीयमान कवि को कई रूप में सुनाई देती है ।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कला संकाय के पूर्व अधिष्ठाता एवं हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कौशल नाथ उपाध्याय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान थे।उन्होंने अपने वक्तव्य मे कहा कि डॉक्टर नितेश व्यास की कविताएं परिवेश से जुड़ी है सभी कविताओं में एक भावनात्मक आवेग है। जिसे वह बिना आवरण के सभी के सामने प्रस्तुत करते हैं। उनकी कविताओं में संवेदनशील अपने अलग रूप में दिखाई देती है उनकी कविताओं में बहुरंगी अर्थ देखने को मिलते हैं उनमें आदि अनादि के प्रश्न, आज के बदलते स्वरूप पर विचार है ।यह काव्य संग्रह इस युग और इस युग के मनुष्य का चित्र स्पष्ट करता है जो अंधकार की कालिख से उजाले की आस को लिख देना चाहता है। नितेश व्यास की कुछ प्रतिनिधि कविताओं के अंशों को पढ़ते हुए युवा कवि राहुल गोयल ने अपने पत्र वाचन के माध्यम से अपना पत्र प्रस्तुत किया ।उन्होंने कहा कि डॉ नीतेश व्यास के पास ना केवल सुंदर शब्दावली है उन्हें बरतने का शऊर भी है व्यासकी कविता प्रभावी और सुंदर होते हुए भौतिकता से परे जाती है। प्रख्यात शायर निजाम साहब ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शब्द को संसार का कारण कहते हुए बताया कि कविता शब्द को छोड़कर शब्द में लिखना, छन्द को छोड़कर छन्द में लिखना है। बाह्य विस्मृति से ही अंतस्मृति जागती है । डॉक्टर नितेश व्यास ने अपनी कविताओं में समय से गुरेज करने का प्रयास किया है।
कार्यक्रम मे शहर के सभी गणमान्य साहित्यकार उपस्थिति थे जिनमें डा आईदान सिंह भाटी,कैलाश कबीर,हबीब कैफ़ी,डा हरिदास व्यास,डा पद्मजा शर्मा ,डा अशोक बोहरा,डा हरिगोपाल राठी,शीम मीम हनीफ़,अफ़ज़ल जोधपुरी,इश्राकुल इस्लाम माहिर,माधव राठौड,डा फतह सिंह राठौड़,डा अनूप पुरोहित, बृजेश अम्बर,निसार राही,डा सुमन बिस्सा,डा संदीप पुरोहित डा अनिल पुरोहित,सुशील व्यास, प्रमोद वैष्णव पं नवरत्न व्यास आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा के सचिव राकेश मूथा ने किया।अन्त में प्रज्ञा के अध्यक्ष कैलाश कबीर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।