किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बयान, जब बिल पर स्टे लगा दिया तो प्रदर्शन क्यों

जयपुर। किसान महापंचायत द्वारा जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए मांगी गयी अनुमति पर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पर खेद जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब ऐसा कुछ होता है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है।  वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने बिलों को स्थगित कर दिया है तो किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं। 
केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। वेणुगोपाल ने रविवार की हिंसा पर भी खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं नहीं होनी चाहिए। विरोध प्रदर्शन बंद होना चाहिए।" वहीं इस बीच, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या संवैधानिक अदालत का रुख करने वाले व्यक्ति या पार्टी को भी इसी मुद्दे के खिलाफ विरोध करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है।

उत्तर प्रदेश में इंटरनेट सेवा बंद
बता दें कि लिखमीपुर में हिंसा भडकने के बाद यूपी सरकार ने सोमवार को संबंधित जिले में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है। इसके अलावा राजनेताओं को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में प्रवेश करने से रोक दियौ तिकोनिया लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है और भारत-नेपाल सीमा के बहुत करीब है।