जनसंख्या नियंत्रण के लिए ऐसी नीति की जरूरत जो "समान रूप से सभी पर लागू हो" : मोहन भागवत

जयपुर। आरएसएस प्रमुख और भाजपा के संरक्षक मोहन भागवत ने आज आरएसएस की वार्षिक दशहरा रैली को संबोधित करते हुए धार्मिक आधार पर जनसंख्या संतुलन पर जोर दिया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक ऐसी नीति की जरूरत है जो समान रूप से सभी पर लागू हो। साथ ही उन्होनें कहा कि "धर्म-आधारित असंतुलन" और "जबरन धर्मांतरण" के कारण देश बिखर सकता है। भागवत ने "धार्मिक समुदाय-आधारित असंतुलन के कारण उभरे नए देशों" पूर्वी तिमोर, कोसोवो और दक्षिण सूडान कोके का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने हिंदी में अपने भाषण में जोर देकर कहा, "जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ धार्मिक आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्वपूर्ण है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।" "जनसंख्या को संसाधन की आवश्यकता होती है, या यह एक बोझ बन जाता है," उन्होंने कहा, "एक विचार है कि जनसंख्या एक संपत्ति हो सकती है। हमें दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीति पर काम करने की आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा कि प्रसव संबंधी किसी भी नीति में महिलाओं के स्वास्थ्य को निश्चित तौर पर ध्यान में रखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि आज की दशहरा रैली भी पहली बार हुई जब आरएसएस ने एक महिला को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। इस रैली की मुख्य अतिथी पर्वतारोही संतोष यादव थी।

हालांकि, भाजपा की केंद्र सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून के विचार से सहमत नहीं दिखती, भले ही इसे पार्टी के सदस्यों और आरएसएस नेताओं द्वारा बार-बार प्रस्तावित किया गया हो। इस साल अप्रैल में, इस तरह के कानून के लिए नामित राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा के विधेयक पर चर्चा में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि परिवार नियोजन और बेहतर स्वास्थ्य सेवा ने वैसे भी जनसंख्या का स्थिरीकरण सुनिश्चित किया है।

मंत्री ने कहा, "कुल प्रजनन दर लगभग 2% तक आ गई है… यह बताती है कि परिवार नियोजन मिशन सफलता की ओर बढ़ रहा है।" श्री सिन्हा ने बाद में अपना विधेयक वापस ले लिया। विपक्षी सदस्यों ने कहा है कि परिवार नियोजन जबरदस्ती का मामला नहीं होना चाहिए।