लाखेरी में दृष्टि बाधित कार्मिक संघ ने मनाया लुई ब्रेल जयंती समारोह

बूंदी 4 जनवरी। दृष्टिबाधित कार्मिक संघ बूंदी के तत्वाधान में गुरुवार को लाखेरी में विश्व लुई ब्रेल जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  डूंगरपुर के जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी भुवनेश्वर सिंह चौहान ने दृष्टि बाधित कार्मिक के लिए सरकार की तरफ से ब्रेल किताबे, डिवाइस उपलब्ध करवाए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दृष्टि बाधित कार्मिक को आधारभूत सुविधा मिले तथा उनके स्थानांतरण पर ध्यान दिए जाने की महत्ती आवश्यकता है।


समारोह की अध्यक्षता कर रहे दृष्टि बाधित कार्मिक संघ उपाध्यक्ष चेतन शर्मा ने कहा कि सामान्य बच्चे या तो रोमन लिपि में पढ़ते हैं या देवनागरी लिपि में, लेकिन दृष्टिहीन बच्चों के पढ़ने के लिए लुई ब्रेल ने एक अलग लिपि विकसित की और उसे ब्रेल लिपि नाम मिला। विशिष्ट अतिथि महेन्द्र शर्मा ने कहा सरकार की ओर से दृष्टिबाधित कार्मिकों को सुविधाओं के लिए सरकार स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधितों के इतिहास में सूरदास है।  भगवान कृष्ण को भक्त आज सूरदास की दृष्टि से दुनिया में लोग को याद करते हैं। इसी तरह रामानंदाचार्य परंपरा के गुरु जगतगुरु दृष्टि बाधित है। दिखाई देता है वो माया है मगर मानव की अन्दर दृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित का कार्य करने जैसा पुण्य सभी को करना चाहिए।
                
विशिष्ठ अतिथि लाखेरी बैंक ऑफ़ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक सत्यनारायण कुमार प्रजापत ने कहा कि दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने के योग्य उपकरण आदि के लिए रोज़गार के लिए बैंक से जो भी मदद हो की जाएगी। बैंक में खाता खुलवाने जैसी सुविधा के साथ कोई भी काम हो सहयोग किया जाएगा। रामायण में जो संगीत दिया वो आज भी देश में गाथा की मिसाल है। विशिष्ठ अतिथि राजकीय महाविद्यालय के संस्कृत व्याख्याता कौशल किशोर गोठवाल ने बताया कि ब्रेल लिपि की 10 पुस्तके भेंट की गई है। लुईस ब्रेल ने दृष्टिबाधितों के पढ़ने और लिखने के लिए इस लिपि का आविष्कार किया था। वो जन्म से ही दृष्टिहीन थे। उनसे प्रेरणा लेकर तथा मौजूदा कूटलिपि में संशोधन कर लुईस ने इस लिपि का आविष्कार किया था। के लुई ब्रेल ने स्वयं एक दृष्टिहीन होने के बावजूद दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने के योग्य बनाया। लकड़ी के कष्ट ट्रेलर ने अपना परिचय दिया और गीत सुनाया जोश पढ़ने के लिए पांचवी कक्षा में पढ़ने वाले नन्हे बालक ने जोश भर दिया।
                
मशहूर संगीतकार जगदीश भारती ने संगीत से सभी का मनमोह लिया। दृष्टि बाधित कार्मिक संघ बूंदी के विक्रम राठौर ने कहा कि सामान्य बच्चे या तो रोमन लिपि में पढ़ते हैं या देवनागरी लिपि में, लेकिन दृष्टिहीन बच्चों के पढ़ने के लिए लुई ब्रेल ने एक अलग लिपि विकसित की और उसे ब्रेल लिपि नाम मिला। संचालन करते हुए दृष्टि बाधित कार्मिक संघ बूंदी के  टीकमचंद जैन ने बताया कि लुई ने यहां इतिहास, भूगोल और गणित में प्रावीण्य प्राप्त किया। इसी स्कूल में एक बार फ्रांस की सेना के एक अधिकारी कैप्टन चार्ल्स बार्बियर एक प्रशिक्षण के सिलसिले में आए और उन्होंने सैनिकों द्वारा अंधेरे में पढ़ी जाने वाली ‘नाइट राइटिंग’ या ‘सोनोग्राफी’ लिपि के बारे में बताया।

यह लिपि कागज पर अक्षरों को उभार कर बनाई जाती थी और इसमें 12 बिंदुओं को 6-6 की दो पंक्तियों को रखा जाता था, पर इसमें विराम चिह्न, संख्‍या, गणितीय चिह्न आदि का अभाव था। फ्रांस के लुई ब्रेल ने स्वयं एक दृष्टिहीन होने के बावजूद दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने के योग्य बनाया। समारोह में अंचल राठौर, महावीर राठौर, लोकेश मीणा आदि मौजूद थे। समारोह में अतिथि गणों का स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती एवं लुई ब्रेल की तस्वीर में माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरुआत की गई।