जयपुर। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद गांधी परिवार पर एक बार फिर से अंगुली उठाना शुरू हो गई। जी 23 के नेताओं ने भी चिंतन करने की बात कही। हार पर मंथन करने के लिए कांग्रेस ने कार्यकारणी बैठक का आयोजन किया। कांग्रेस की कार्यकारणी बैठक लगभग साढे चार घंटे चली लेकिन निष्कर्ष कुछ नहीं निकला।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि वे अपने परिवार के सभी सदस्यों (राहुल गांधी, प्रियंका गांधी) के साथ इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं यदि ये कांग्रेस के हित में है तो। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के इस फैसले को खारिज कर दिया और उन्हें ही नेतृत्व करने की बात कही।
कांग्रेस ने कहा, "सीडब्ल्यूसी सर्वसम्मति से श्रीमती सोनिया गांधी के नेतृत्व में को स्वीकार किया है। कांग्रेस अध्यक्ष से आगे बढ़कर नेतृत्व करने, संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने, राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक और व्यापक संगठनात्मक परिवर्तनों को प्रभावित करने का अनुरोध करती है।"
संगठनात्मक चुनावों पर "चिंतन शिविर"
सीडब्लूसी की बैठक के दौरान यह भी फैसला लिया गया कि संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद संगठनात्मक चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए "चिंतन शिविर" आयोजित किया जायेगा जिसमें संगठन को मजबूत करने के लिए कुशल नेतृत्व क्षमतावान को चुना जायेगा।
कांग्रेस कार्यकारणी बैठक में 50 से अधिक नेताओं ने भाग लिया। इन सभी नेताओं में उन पांच राज्यों के कांग्रेस नेता शामिल थे जहां चुनाव हुए थे। सूत्रों के मुताबिक सीडब्ल्यूसी में "जी-23" से केवल तीन सदस्य हैं, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक। जिनमें से श्री शर्मा और गुलाम नबी आजाद ने बैठक में खुलकर अपनी बात रखी।