जयपुर। चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव की घोषणा में देरी का एक कारण बताते हुए सफाई दी है। आयुक्त राजीव कुमार ने चुनावों में घोषणा की देरी को मोरबी सस्पेंशन ब्रिज का गिरना बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि क्या मोरबी त्रासदी की जांच रिपोर्ट जारी होने से दो चरणों में होने वाले चुनावों में बराबरी का मौका मिलेगा या नहीं। गुजरात में 1 दिसंबर और 5 दिसंबर को चुनाव होने वाले हैं। बता दें कि आयोग ने 14 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश चुनाव की घोषणा की थी। दोनों राज्यों में वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी।
जहां कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने गुजरात चुनाव की घोषणा में कथित रूप से देरी करने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की और आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। वहीं, सीईसी ने पक्षपात के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि आयोग को मौसम, विधानसभा के कार्यकाल की अंतिम तिथि और आदर्श आचार संहिता के लागू होने के दिनों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखना था।
राजीव कुमार ने कहा कि गुजरात विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 18 फरवरी को समाप्त हो रहा है और चुनाव की घोषणा 110 दिन पहले कर दी गई है। उन्होने कहा कि कई कारकों को ध्यान में रखकर चुनाव तारीख की घोषणा की जाती है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता के बड़े सवाल पर, कुमार ने कहा कि बड़ी संख्या में विधानसभा चुनावों ने आश्चर्यजनक परिणाम दिए हैं।
कुमार ने कहा, "चुनाव से पहले, हमें ईवीएम के बारे में लंबे पत्र मिलते हैं, जिनमें शिकायत होती है कि ईवीएम विश्वसनीय नहीं है। लेकिन जब परिणाम उनके फेवर में आता है तो उसे स्वीकार कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की "निष्पक्षता" आयोग का एकमात्र फोकस है। कुमार ने कहा, "यह हमारे लिए नया नहीं है। यह विरासत की बात है। यह देश की गौरवशाली विरासत है।"