राजस्थान की राजधानी जयपुर से सटा रामगढ़ बांध पूरी तरह से सूख चुका है।
जमवारामगढ़। (संजय सेन) राजस्थान की राजधानी जयपुर से सटा रामगढ़ बांध पूरी तरह से सूख चुका है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से सटा रामगढ़ बांध पूरी तरह से सूख चुका है। दिल्ली में 1982 में एशियाई खेलों में नौकायन प्रतियोगिता जयपुर के भव्य कहे जाने वाले रामगढ़ बांध में आयोजित हुई थी। यह कल्पना कितनी खतरनाक और भयावह है कि उस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले देश-विदेश के नौकायन प्रतियोगी यदि अब इस बांध को देखें ! तो उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं होगा, कि जिस लबालब भरे बांध मे उन्होंने अपनी नौकाएं दौड़ाई थीं, वो आज अब वहां केवल जंगली झाडियां ही दूर तलक तक दिखाई पड़ती हैं।
लाखों की आबादी को पानी पहुंचाने वाला एक बांध देखते ही देखते एक विराने में तब्दील हो गया।
राजस्थान में जल संचय करने का यह एक बेजोड़ उदाहरण हुआ करता था। जिसे लगभग सवा सौ साल पहले बनवाया गया था।
आज यह भी बांध पूरी तरह से खत्म हो चुका है। सहसा एक नजर में यह विश्वास करना बहुत कठिन है कि यह वही बांध है जो पूरे जयपुरवासी अपनी प्यास बुझाते थे।
सचमुच में यह बांध अब वीराने में सिमट कर रह गया है। दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा हुआ है। इस सन्नाटे को टूटे-फूटे पानी स्प्लाई करने वाले कार्यालय के टीन शेड पर इधर-उधर उछल कूद करने वाले बंदरों की वजह से यहां पर थोड़ी बहुत शोर शराबा रहता है
अन्यथा यहां बांध अपने बीते सुनहरे कल की बस यादें ही समेटे हुए है। बांध की जंग लगी पाइप लाइनें हों या बंद पड़े मोटर के हैंडल या यहां-वहां दूर तक गिरीपड़ी बांध की दीवारें हों। यह बांध के खत्म होने की कहानी बयां कर रहा है। हालांकि इसके बावजूद बांध की दीवारों पर बने गुंबद अब भी शान से खड़े हैं और भूले-भटके आने वालों को अपने भव्य अतीत को दर्शातें है।
जयपुर घूमने आने वाले बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक सवा सौ साल पुराने इस परंपरागत बांध को अवश्य देखने आते थे। राजस्थान में जल संचय करने की परंपरा की एक लंबी फेहरिस्त है। उसमें सूची में यह बांध भी शामिल था। लेकिन जयपुर शहर के महानगर में बदलते ही इस बांध के कैचमेंट क्षेत्र की जमीनों पर लोगों द्वारा कब्जा करना शुरू कर दिया। यह कब्जा इतना अधिक हो गया है कि इस बांध में चार नदियों से आने वाला पानी ही बंद हो गया।
अतिक्रमणकारियों ने कुछ इस प्रकार से कब्जा किया कि इस बांध का जल स्त्रोत को ही रोक दिया। और नतीजा सामने है एक सूनसान पड़ी खाली जगह। दूर-दूर तक बस जंगली झाडियां ही दिखाई पड़ रही हैं। कहीं दूर तलक भी पानी की एक झलक तक नहीं दिखाई दे रही है। राजस्थान की राजधानी जयुपर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित रामगढ़ बांध में अब पिछले एक डेढ़ दशक से कोई पर्यटक नहीं जाता है।
इस संबंध में जयपुर में विदेशी पर्यटकों को पिछले पांच सालों से राजस्थान की सैर कराने वाले टैक्सी ड्राइवर राजेश गुर्जर बताते हैं कि अब भी हर विदेशी की घूमने वाली जगहों में एक जगह निश्चित ही रामगढ़ बांध होती है। लेकिन हम ही उन्हें बता देते हैं कि अब वहां कुछ नहीं है। यह बांध 15.5 वर्ग किलोमीर में फैला हुआ है। एशियाई खेलों के आयोजन के 41 साल बाद इस बांध में पानी का एक बूंद नहीं है।
चालीस सालों में सवा सौ साल पुराना बांध खत्म हो गया। उसे जमीन खा गई या आसमान खा गया, अब यह यक्ष प्रश्न नहीं है क्यों कि इस प्रश्न का जवाब हर जयपुरवासी और सरकार के पास है। पूरे बांध पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो चुका। इस कब्जे को न तो अब तक सरकार हटा पाई है और न हीं अदालत।
इसीलिए अब इस समय इस जीवंत मुद्दे को लेकर जमवारामगढ़ के सभी बुद्धि जीवी ओर युवाओं, सभी पार्टियों के प्रतिनिधि मंडल के लोगो ने चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर एक संगठन बनाकर जमवारामगढ़ के बाँध में पानी लाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नींद से जगाने के लिये टिवीटर ओर सोशल मीडिया पर जमवारामगढ़ बाँध में पानी लाओ अभियान चला रही। और यह अभियान 30 जुलाई 2021 को पूरे जोर शोर से चलाया जाएगा।