बून्दी‘‘मिशन सुरक्षित बचपन’’ के तहत् इमानुअल मिशन स्कूल में वार्ता
बून्दी‘‘मिशन सुरक्षित बचपन’’ के तहत् इमानुअल मिशन स्कूल में वार्ता
बूंदी 22 दिसम्बर, बून्दी पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति एवं न एक्शनएड़ व यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में संचालित बालमित्र पुलिस कार्यक्रम के अन्तर्गत जिला पुलिस अधीक्षक की पहल “मिशन सुरक्षित बचपन” के तहत् आज इमानुअल मिशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल बून्दी में जिला पुलिस अधीक्षक जय यादव, विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सुनील यादव, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पोद्दार, एडिशनल एसपी किशोरी लाल, डीवाईएसपी हेमंत नोगया, बाल कल्याण समिति सदस्य छुट्टन लाल शर्मा, रोहित गुदरावत, सदर थाना अधिकारी अरविंद भारद्वाज कोतवाली थाना अधिकारी सहदेव मीणा, विमंदित गृह अधीक्षक सुरेश गोस्वामी उपस्थित रहे। मुख्य वक्ताओं ने बच्चों के साथ बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों एवं सुरक्षित बचपन पर जागरूक किया। “मिशन सुरक्षित बचपन” के उदेश्य बताये कि बून्दी पुलिस प्रत्येक मंगलबार को बच्चों के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं जिले में बच्चों के साथ होने वाले हिंसा को रोकने हेतु बच्चों से सीधे सवाल-जवाब कर बच्चों की समस्याओं दूर करने हेतु मंच प्रदान किया जा रहा है।
सदर थाना प्रभारी अरविंद भारद्वाज ने बच्चों को बताया ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन ना करें 18 साल से कम बच्चों को वाहन नहीं चलाने चाहिए। किसी बच्चे से यदि कोई एक्सीडेंट हो जाता है , तो पेनल्टी के रूप में मां-बाप को सजा का प्रावधान है, हेलमेट का प्रयोग करना चाहिए। आज सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुनील कुमार यादव ने बच्चों को मोबाइल उपयोग के बारे में बताया की यह आग और पानी की तरह है, जैसा आग और पानी के बेकाबू होने पर तबाही मचाते है उसी प्रकार मोबाइल का उपयोग है, सही उपयोग करे तो लाभ दायक और गलत साईट पर चले गए तो वह बर्वाद कर सकता है।
जय यादव ने बच्चों से वार्तालाप के दौरान अपने जीवन में पढ़ाई, कानून व्यवस्था, और जागरूकता के बारे में बातचीत की गई और बच्चो को संकट के समय चाइल्ड हेल्प लाइन के 1098 और पुलिस के टोल फ्री न. 100 पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी है। बच्चो के सबल लिए और बताया की सेल्फ डिफेंस लडकियो के लिए बहुत आवश्यक है प्राथमिक तौर पर कई अपराधों से बचा जा सकता है, इंडियन पैनल कोर्ट के अनुसार सेल्फ डिफेंस मैं सुरक्षा प्रदान की जाती है। हमारी ट्रेंड महिला कॉन्स्टेबल को हम आप लोग यहां शीघ्र ट्रेनिंग के लिए भिजवागे। बालक सर क्या हमें अपराध के विरुद्ध शिकायत करनी चाहिए, यदि अपराधी हमें डराए तो भी? पुलिस अधीक्षक-हमें अपनी आवाज हमेशा उठानी चाहिएं, अपराधियों के विरुद्ध शिकायत हमेशा लगानी चाहिए इससे अपराधियों के हौसले पस्त होंगे शिकायत करने वालों का नाम गुप्त रखा जाता है, अपराधी भी यही चाहते हैं कि उनकी शिकायत ना लगाई जाए। शिकायत करने से अपराधी को तो सजा मिलती है साथ में दूसरे लोग भी हिम्मत जुटा पाते हैं अपने खिलाफ हुए अपराधों के बारे में बोलने के लिए। बालक-साइबर क्राइम से प्रोटेक्शन कैसे मिलेगा? पुलिस अधीक्षक-बच्चों को फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया अकाउंट से बचना चाहिए। बच्चों को किताबें पढ़नी चाहिए। खेल पर ध्यान देना चाहिए। खेल को अपने जीवन का हिस्सा भी बनाना चाहिए । मैं स्वयं किसी भी खेल को खेलने के लिए ज्यादा प्रोत्साहित रहता हूं। बालिका सर देखने में आ रहा है कि अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसमें पुलिस का क्या रोल है? पुलिस अधीक्षक- अपराध से ज्यादा जागरूकता बढ़ी है रिपोर्टिंग बढ़ गई है, इसलिए केस बढ़ रहे हैं। पुलिस और सरकार का प्रयास है कि जागरूकता बढें और लोग सामने आए और अपनी बात रखें और उनके साथ जो गलत हुआ है। उससे बेझिझक बताएं लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। अपराध के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। पुलिस का काम ही अपराधों को रोकना और जनता को सुरक्षा प्रदान करना है। बालिका-प्रश्न 5 पोक्सो कानून क्या है? पुलिस अधीक्षक- प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रंस फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस, 2012 में यह कानून बना था। इसमें किसी को बख्शा नहीं जाता नाबालिक बच्चों के साथ हुए अपराध की सजा का सबसे कठिन कानून बनाया गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। बालक बैकबेंचर्स जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं? पुलिस अधीक्षक-पीछे बैठने से पढ़ाई का कोई संबंध नहीं है ,सफलता कोई भी प्राप्त कर सकता है। पढ़ाई के साथ अन्य फील्ड में भी खेलकूद में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। बालक- पुलिस पर राजनेताओं का कितना प्रभाव रहता है? पुलिस अधीक्षक- कानून सबके लिए बराबर है कानून से ऊपर कोई भी व्यक्ति नहीं है यदि कोई प्रभावित होता भी है, तो न्यायालय इन सबसे ऊपर है। मीडिया की भूमिका भी इसमें सकारात्मक हो सकती है रह, बालिका-ड्रग्स से बच्चों पर क्या असर होता है ? पुलिस अधीक्षक-ड्रग्स बेचने वाले को पता है कि बच्चों को आसानी से बहकाया जा सकता है। पहले बच्चों को फ्री में देते हैं जब बच्चों की आदत पड़ जाती है, तो फिर उन के माध्यम से वे अपना कार्य आसानी से करते हैं, इसलिए बच्चों को इस से दूर रहना चाहिए और इसकी सूचना तुरंत पुलिस ,सीडब्ल्यूसी या सीधे कोर्ट में भी दी जा सकती है। बालिका-थानों पर सुनवाई नहीं होती तो क्या करें? पुलिस अधीक्षक- अन्य उच्च अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है और एसपी का ऑफिस 24 घंटे आप लोगों के लिए खुला है! वहां आप पहुंच कर अपनी शिकायत कर सकते हो और अपनी बात बता सकते हो सीधा मुझसे भी मिला जा सकता है।