80 साल का बुजुर्ग सरकारी दफ्तरों में 12 साल के मानदेय के लिए काट रहा चक्कर

संवाददाता  सुमेर सिंह राव

उदयपुरवाटी l
पंचायत राज व स्वायत विभाग में 80 साल का बुजुर्ग सेवा दे चुका है। बुजुर्ग 12 साल से मानदेय लेने के लिए 20 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है । फिर भी बुजुर्ग को अपना मानदेय नहीं मिल रहा है और नहीं विभाग के अधिकारियों से संतोषप्रद जवाब मिल रहा है।
प्राप्त सूत्रों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में लोगों की स्वास्थ्य सेवा करने के लिए गांव गांव में स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगाए गए थे । जिसमें नांगल निवासी सूरजमल जांगिड़ को नांगल में मानदेय पर बतौर हेल्थ वर्कर नियुक्त किया गया था। जांगिड़ के अनुसार 1978 में उसे प्रशिक्षण दिया गया था, उस प्रशिक्षण मैं ₹200 महीने का मानदेय मिलता था जो प्रशिक्षण 3 महीने तक चला। उसके बाद में उसको नियुक्ति दे दी गई। बुजुर्ग को 1988 तक बराबर वेतन मिलता रहा। उसके बाद उनको स्वास्थ्य विभाग से हटाकर पंचायत राज विभाग से जोड़ दिया गया था। पंचायत राज विभाग के अधीन रहते हुए उनको 1988 तक ₹50 मासिक मानदेय बराबर मिलता रहा था। उसके बाद मान देय देना बंद कर कर दिया। वह 2000 तक बराबर सेवा देता रहा। उसको लंबे समय तक मानदेय नहीं मिला तो उसने न्यायालय की शरण ली । जांगिड़ ने बताया कि न्यायालय ने उनको मानदेय देने का फैसला भी दे दिया था। सरकारी कार्यालय में कागजात चल रहे हैं लेकिन मानदेय नहीं मिला । बुजुर्ग अपनी सेवा के दौरान 12 साल के बकाया मानदेय के लिए 20 साल से बराबर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है । बुजुर्ग समस्त कागजात को संभाल कर रखा हुआ है। उसको आंखों से दिखना भी कम हो गया हैं तथा चलना फिरना भी मुश्किल हो गया हैं लेकिन हिम्मत करके कागजात को बैग में डालकर सरकारी दफ्तरों में मानदेय के लिए जैसे तैसे पहुंच जाता है। सरकारी दफ्तरों में अधिकारी उसके प्रार्थना पत्र पर विचार करने के बजाय कार्रवाई करने का आश्वासन देकर उसको वापस लौटा देते हैं। जांगिड़ के अनुसार वह काफी परेशान हो रहा है उसका मानदेय सरकारी खजाने में जमा पड़ा है लेकिन अधिकारी उन्हें परेशान कर रहे हैं।

बाबूलाल रेगर, विकास अधिकारी उदयपुरवाटी, इनका कहना है
इस तरह के मामले की मुझे जानकारी नहीं है और मेरे
नॉलेज में नहीं है।