प्रकृति के सहगामी होने से जीवन सुखमय और निरोगी बनता है – गोपाल शास्त्री
राजसमन्द। अणुव्रत विश्व भारती राजसमंद पर मानस योग साधना अपनाकर अनेक कैंसर रोगी आज पूर्णतया स्वस्थ जीवन यापन कर रहे है |
इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक स्प्रिचुअलिज्म (IASS) मेरठ के तत्वावधान में राजसमन्द में मानस योग साधना पर आधारित तृतीय सातदिवसीय स्वास्थ्य एवं आध्यात्म साधना शिविर के आज पंचम दिवस में मेरठ से पधारे हुए मुख्य प्रशिक्षक गोपाल शास्त्री ने शिविरार्थियों को प्रातः कालीन सत्र में वमन क्रिया, जल नेति, हास्यासन एवं विभिन्न रोगों जैसे कमर दर्द, साईंटिका आदि रोगों में विशेष रूप से लाभदायक अनेक आसनों के बारे में बताया |
प्रथम सत्र में प्रकृति के सिद्धांत को समझाते हुए शास्त्रीजी ने कहा की प्रकृति सदैव देने के सिद्धांत पर कार्य करती है ना की संग्रह के सिद्धांत पर | वृक्ष फल एवं ऑक्सीजन देते है, सूर्य रोशनी एवं ऊर्जा देता है, नदी जल देती है | प्रकृति की हर रचना कुछ ना कुछ देने के लिए ही बनी है | मानव शरीर भी प्रकृति की ही सर्वश्रेष्ठ रचना है जो प्रकृति का सहगामी होकर, सदैव देने का भाव रखकर ही आनंद के साथ अपना जीवनयापन कर सकता है | जब जब इंसान प्रकृति से विमुख होता है अथवा उसके चक्र से छेड़छाड़ करता है तो उसे प्रकृति का दंड झेलना पड़ता है | प्रकृति के साथ चलने से इंसान पुरस्कृत भी होता है | मानस योग साधना इंसान को प्रकृति से एकाकार करने की ही विधा है जिसके माध्यम से इंसान रोगमुक्त होकर प्रकृति प्रदत्त आनंद के साथ जीवनचक्र को पूर्ण कर सकता है |
मानस योग साधना की व्याख्या करते हुए बताया यह स्वयं भगवान शिव के द्वारा रचित साधना है जिससे मनुष्य की त्रिस्तरीय चिकित्सा संभव है जिसमें दैहिक, देविक व भौतिक सभी तरह के रोगो का उपचार संभव है। शुगर, बीपी, थायराइड, बुखार, जुकाम, कब्ज आदि रोग तो बहुत जल्दी ही ठीक हो जाते हैं। कैंसर जैसी बीमारी जिसे प्राय: असाध्य बताया जाता है उसका उपचार तो मानस योग साधना में सबसे सरल है | उन्होंने कैंसर रोग की पूरी वैज्ञानिक व्यख्या करते हुवे अनेक प्रसंगों से विश्वास दिलाया की अनेक कैंसर रोगी इस साधना के माध्यम से आज पूर्णतया स्वस्थ जीवंनयापन कर रहे है | उन्होंने उपवास की महिमा बताते हुए बताया शास्त्रों में कहा गया है लंघनम परमं औषधिम। जब हम भोजन का लंघन अर्थात उपवास करेंगे तो हमारे शरीर का हीलिंग सिस्टम अपने आप काम करना शुरू कर देगा।
पुरे दिन केवल शुद्ध एवं प्राकृतिक आहार पर आधारित भोजन प्रणाली का विशेष अनुभव शिविरार्थियों को बहुत सुकून दे रहा है|शिविर में शास्त्री जी से प्रेरित होकर अनेक साधकों ने तुलादान भी किया |
शिविर में कमल किशोर व्यास, जगदीश प्रसाद व्यास, सुरेश पालीवाल, पुष्पा तोतला, सीमा झंवर, बालमुकुन्द तोतला, मनोज गुप्ता, सुधीर व्यास, राजेंद्र सेठिया, संजय व्यास, गिरिराज व्यास, सुरेश व्यास, कमलेश कच्छारा आदि अनेक कार्यकर्ता नियमित सेवाए दे रहे है | राजसमन्द शहर के अतिरिक्त अनेक जिलों से साधक शिविर का लाभ ले रहे है | मीडिया प्रभारी जितेन्द्र लड्ढा ने बताया की शिविर से सम्बंधित विषयों की विस्तृत जानकारियों, आदर्श भोजन प्रणाली हेतु आहार निर्माण की विविध पद्धतियों, प्राकृतिक आहार से चिकित्सा आदि की समस्त जानकारी हेतु विशेषज्ञों द्वारा लिखित विभिन्न साहित्य शिविर स्थल पर उपलब्ध कराया जा रहा है | शिविर दिनांक 16 अप्रैल सांय 6 बजे समापन समारोह के साथ संपन्न होगा |