भवई नृत्यांगना हेमलता ने किए बावलिया बाबा के दर्शन

संवाददाता सुमेर सिंह राव

उदयपुरवाटी / बुगाला।
ऑटो रिक्शा चलाकर जीवन यापन करने वाली युवती संघर्षों के बाद नृत्य के क्षेत्र में आकर अब खुश नजर आ रही है।बावलिया बाबा मंदिर में दर्शन करने आई हेमलता कुशवाहा ने हमारे संवाददाता से मुलाकात कर अपनी कहानी बयां की।इन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में ही इनकी शादी करदी गई थी। 18 साल की उम्र में एक बच्चा हो गया था।पति ने इन्हें धोखा देकर दूसरी शादी कर ली।उसके बाद बच्चे के लालन पालन के लिए मर्द ऑटो ड्राईवरों के बीच एक अकेली महिला ऑटो चलाना शुरू किया। हजारो कठिनाइयां झेलते हुए भी अपने गुरू डॉ रूपसिंह शेखावत से भवई नृत्य की शिक्षा ली।जयपुर रविन्द्र मंच से अभिनय की शुरुआत के बाद आज पूरे भारत मे 15 सौ स्टेज शो कर चुकी हूं।
विलुप्त होती जा रही राजस्थान की पारंपरिक भवई नृत्य शैली
कुशवाहा ने बताया कि भवई नृत्य राजस्थान की एक पारंपरिक नृत्य शैली है।जिसमें वह भी चुनिंदा कलाकारों में एक है।हेमलता जीवन में आए दुःख और कठिनाईयों के बावजूद आज भी जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिए को ज्यादा महत्व देती है। उनका कहना है कि उनके पास अभी बीस साल भवई करने का समय है इस समय मे वो पूरे देश में अपने शो के जरिए इस नृत्य कला को देश विदेश मे पहुंचाना चाहती है।उसके बाद का समय वह नई पीढी को सिखाने में व्यतीत करेगी।वर्तमान में भवई के विलुप्तता के कगार पर पहुंच जाने के कारणो के बारे मे पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस कला का ढंग से प्रचार नही किया गया।शादी ब्याह के समारोह तक ही सीमित कर दिया गया।
कलाकारों को मिले सहयोग और सम्मान
भवई के कलाकारों को उचित मानदेय व सम्मान नहीं मिलना भी एक बड़ी वजह है।जहां विदेशों में भवई कलाकार एक परफार्मेंस के लिए एक लाख रुपए तक लेते हैं वही भारत मे 11 हजार देने मे भी लोग हिचकते हैं वही जयपुर में तो 5 छह हजार देने भी हिचकिचाहट होती है इसलिए नई पीढी इसको सीखने के लिए तैयार नही हो रही।भवई नर्तक को तैयार होने में तकरीबन 5 साल की कठिन साधना और इतने ही सालों का अभ्यास लगता है।जीवन के दस साल व्यतीत करने के बाद जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष करना पड़े यह आज का युवा नहीं चाहता।हेमलता का कहना है कि मुझे भवई से प्यार है इसलिए मै करती आई हूं और करती रहूंगी। इस कला और कलाकारों को बचाने के लिए सरकार व सोसाइटियों को आगे आना चाहिए।हेमलता ने इसके अलावा बहुत सारी बातें बताई जिसमें उनके संघर्ष से इस मुकाम तक पहुंचने की साहसिक कहानी का पता चला।सच में मुकाम बनाने के लिए जिस अटल मानसिकता और मजबूत ईरादों की जरूरत होती है उसकी जीती जागती मिसाल है हेमलता।हम उनके बेहतर भविष्य की कामना करते हैं।