चौमू को भी मात दे रहे हैं बुगाला के जीतू के तरबूज
गर्मी में राहत देने वाले मेवे(तरबूज)की बुगाला में बंपर खेती
सुमेर सिंह राव
उदयपुरवाटी / बुगाला
गर्मी में राहत देने वाला मेवा (तरबूज) इन दिनों पककर तैयार हो चुका है जिनकी बिक्री फिलहाल गांव-गलियारों,चौराहों सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हो रही है।गांव में वैसे तो अनेक किसानों ने तरबूज की खेती कर रखी है लेकिन किसान जीतू बुगालिया के खेत में पक्के तरबूजों की अलग ही पहचान है।वे मिठास में चौमू के तरबूजों को टक्कर दे दे रहे हैं।इन्होंने बताया कि वह तरबूज की फसल के लिए बीज चौमू से ही खरीदकर लाया था तथा वहीं किसी परिचित किसान के पास खेती करने का तौर तरीका सीखा था। पिछले तीन वर्षों से जीतू तरबूजों की बम्पर खेती कर रहे हैं। इस बार उन्होंने अपने खेत में करीब दस बीघा में तरबूजों की खेती कर रखी है। उन्होंने 15 फरवरी के आसपास खेत में बीज लगाए थे। जो कि करीब अढाई महीने के बाद अब तरबूज पककर तैयार हो गए है। जीतू ने पिछले एक सप्ताह से इसकी बिक्री भी शुरू कर दी है।
बुगालिया ने बताया कि तरबूज की खेती के लिए बूंद-बूंद सिंचाई पद्धती का प्रयोग करना पड़ता है जो कि अन्य खेती से थोड़ा अलग है। फसल में खरपतवार न उगे इसके लिए धोरों को प्लास्टिक से ढक दिया जाता है। इन्हीं धोरों के बीच पतली पाइप के जरिए पानी से सिंचाई की जाती है। तरबूज की फसल को पानी की भरपूर आवश्यकता होती है। जिसकी वजह से धोरों को प्लास्टिक से ढकने के कारण इसमें नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है।
इन्होंने बताया कि तरबूजों की खेती में किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद व कीटनाशक दवा का प्रयोग नहीं किया गया है। केवल उर्वरता के लिए गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है। जो कि पूर्णतया आर्गेनिक है। चिकित्सकों के अनुसार गर्मियों के दिनों में तरबूज खाने से शरीर में पानी का स्तर उच्च रहता है जो कि हमें हैजा,अतिसार,लू आदि रोगों से बचाता है।
जीतू को करीब दस बीघा में तैयार तरबूजों की इस बार पैदावार से गत वर्ष चार लाख रुपये की आय हुई थी।इस बार ज्यादा होने की उम्मीद है।यह तैयार तरबूजों को बेचने के लिए खूद कहीं नहीं जाते है। बल्कि खरीददार स्वयं ही इनके खेत में गाड़ी लेकर आ जाते हैं। फिलहाल तरबूज की बिक्री दस रुपये प्रति किलोग्राम से हो रही है।दूर दराज से काफी लोग यहां खरीदने आते हैं।