संभाग स्तरीय महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित

-शांति एवं अहिंसा विभाग द्वारा हुआ कार्यक्रम


कोटा 13 मार्च। संभाग स्तरीय कस्तूरबा गांधी महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। जिसमें लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण एवं महिला अधिकारों के लिए जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गाँधीवादी विचारक पंकज मेहता ने समाज में महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में महिलाएं सदैव पूजनीय एवं सशक्त रहीं हैं। उन्होंने कहा भारत में विभिन्न त्योहारों पर देवी उपासना की परंपरा साबित करती है कि भारत मे प्रारम्भ से ही महिलाओं को पूजनीय एवं सम्मानजनक दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा भारतीय शास्त्रों में भी लिखा है जहां नारी की उपासना की जाती है वहां देवताओं का वास होता है।

उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन में कस्तूरबा गांधी के योगदान की जानकारी देते हुए बताया कि जीवन की विषम परिस्थितियों में कस्तूरबा गांधी ने धैर्य एवं संयम का परिचय देते हुए अपने पति महात्मा गांधी का सहयोग किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी के सफल जीवन में कस्तूरबा गांधी का अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा, शिक्षा, श्रम, अनुसंधान आदि समस्त क्षेत्र में महिलाएं परचम लहरा रही हैं। फिर भी महिलाओं की स्थिति कुछ स्थानों पर कमजोर है जिसके लिए समाज में मानसिकता का बदलना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा सामाजिक मानसिकता को बदलने की क्षमता भी महिलाओं में है, अगर एक महिला समाज की मानसिकता को बदलना चाहे तो वह स्वयं के परिवार से महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

कार्यक्रम में समाजशास्त्र की एसोसिएट प्रो. डॉ ज्योति सिडाना ने 21वीं सदी में महिलाओं की भूमिका पर जानकारी देते अमृता प्रीतम एवं कमला भसीन जैसी नारीवादी लेखिकाओं की पंक्तियां एवं कविताओं को सुनाकर समाज में महिलाओं की स्थिति  पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा एक महिला के लिए सोचने समझने एवं प्रश्न करना बहुत आवश्यक है और सामाजिक मानसिकता में बदलाव के साथ ही महिला प्रश्न करने की हिम्मत जुटा पाती हैं।

कार्यशाला मे सह-अध्यापिका हिन्दी डॉ कविता मीणा ने कहा कि महिलाओं का अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बहुत आवश्यक है एवं शिक्षा ही एक मात्र ऐसा हथियार है जिसके माध्यम से महिलाएं अपनी स्थिति में सुधार कर सकती हैं, क्योंकि शिक्षा आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है जिससे महिलाओं की स्थिति परिवार एवं समाज में मजबूत हो सकती है।

कार्यक्रम में सहआचार्य, अर्थशास्त्र मीरा गुप्ता ने कोटा की संभागीय आयुक्त उर्मिला राजोरिया एवं सिटी एसपी डॉ. अमृता दुहन का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अहम पदों पर पूर्ण जिम्मेदारी के साथ अपनी कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा भारत एवं प्रदेश के वित्त की बागडोर सफल महिला मंत्रियों के हाथों में है जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित होता है की महिलाएं घर एवं कार्य में संतुलन बनाने में दक्ष होती हैं। उन्होंने कहा आबादी का आधा हिस्सा होने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं का योगदान मात्र 18 प्रतिशत है, इसलिए महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए उनका आर्थिक रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर होना आवश्यक है।

कार्यक्रम में आचार्य राजनीति शास्त्र डॉ. उमा बडोलिया, सहायक प्रोफेसर राजनीति विज्ञान डॉ. बीनू कुमावत, आचार्य हिन्दी डॉ मनीषा शर्मा ने कार्यक्रम में केन्द्र एवं राज्य सरकार की महिलाओं से संबंधित योजनाओं, महिलाओं की राजनीति में भागीदारी एवं सामाजिक विकास, देश की महिलाओं की सक्सेज स्टोरी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में भ्रूण हत्या, सामाजिक मान्यताओं महिला शिक्षा, साक्षरता दर, कार्य एवं परिवार में संतुलन, कार्यस्थल पर महिला अधिकारों व सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। कार्यक्रम में प्रमाण पत्र देकर महिलाओं को प्रोत्साहित किया। नईम अंसारी एवं मो. राहिल खान द्वारा कार्यक्रम का समन्वय किया गया एवं संज्ञा शर्मा द्वारा मंच संचालन किया गया। कार्यक्रम में एसीईओ जिला परिषद मजहर इमाम, शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी एवं कार्मिक सहित स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, छात्राएं उपस्थित रही।