संभागीय आयुक्त ने जिला कलक्टरों को लिखा पत्र, उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने एवं निगरानी के लिए प्रभावी कदम उठाये - संभागीय आयुक्त

संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा |

संभागीय आयुक्त कैलाशचन्द मीणा ने संभाग में रबी फसलों में उर्वरकों की आपूर्ति के लिए राज्य से बहार जाने वाले उर्वरक को रोकने तथा कृषि आदान विक्रेताओं द्वारा अधिक दर या कालाबाजारी करते पाये जाने पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये है।
संभागीय आयुक्त कैलाश चन्द मीणा ने बताया कि संभाग में डीएपी उर्वरक की संभावित कमी के मध्यनजर एसएसपी उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है जिसके लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक तुलनात्मक रूप से सस्ता तथा आसानी से उपलब्ध होने वाला उर्वरक है, जो कि फाम्स्ॅोरस के साथ-साथ सल्फर एवं कैल्शियम पौषक तत्वों की भी आपूर्ति करता है तथा विशेषकर तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए बहुत उपयोगी है।
उन्होंने संभाग के जिला कलक्टरों को, कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डीएपी उर्वरक की संभावित कमी के मध्यनजर कानून व्यवस्था बनाये रखने तथा सरसों एवं चना फसलों में कृषकों की मांग के अनुसार आवश्यक पौषक तत्वों की पूर्ति सुनिश्चित की जाये।
पौषक तत्वों की पूर्ति के लिए पालना सुनिश्चित करें-
संभागीय आयुक्त ने बताया कि सरसों व चना फसलों के लिए कृषक को डीएपी के अधिकतम 10 बैग दिए जायें। कृषक के आधार कार्ड व जमाबंदी के आधार पर 2ः3 में डीएपी एवं एसएसपी उर्वरक दिये जायें। उन्होंने बताया कि एक कृषक 4 बैग डीएपी लेता है मतो उसे 6 बैग एसएसपी के दककर डीएपी की संभावित कमी को कुछ कम किया जाये। संभाग के जिलों को आवंटित डीएपी उर्वरक को अन्य राज्यों में जाने से रोकने के लिए जिलों के बॉर्डर पर चैक पोस्ट स्थापित किये जायेंगे एवं अवैध तरीके से अन्य राज्यों में डीएपी जाता है तो संबंधित के विरूद्ध नियामानुसार प्रशासनिक कार्यवाही की जाये। उन्होंने बताया कि उपखण्ड अधिकारी या तहसीलदार के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कार्मिकों के संयुक्त दल का गठन कर जिले में स्थित कृषि आदान विक्रताओं का अधिकाधिक निरीक्षण करायें जिससे डीएपी उर्वरक की संभावित कालाबाजारी को रोका जा सकें।
उन्होंने सभी आदान विक्रेताओं को कृषि विभाग के माध्यम से यह भी निर्देशित करायें कि किसी भी कृषि आदान विक्रेता के कालाबाजारी में संलिप्त पाये जाने पर साथ ही निर्धारित दर से अधिक दर पर डीएपी की बिक्री करते हुए पाया जाये तो उसके विरूद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं उर्वरक नियंत्रण के प्रावधानानुसार कार्यवाही करवाकर जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दें।