डॉक्टर बैरवा ने मातृत्व शौक पर, समाज में चल रही रूढ़िवादी कुरीतियों को मिटाने के लिए की नई शुरुआत
दौसा।
सदियों से समाज में चल रही रूढ़िवादी कुरीतियों को मिटाने के लिए एक पहल डॉ बीएल बैरवा न्यूरो सर्जन एसएमएस ने की। अपने माता के देहांत पर अक्सर समाज में गंगा प्रसादी का आयोजन किया जाता है। उन कृतियों को मिटाते हुए डॉक्टर बैरवा ने तिये की बैठक पर माता के नाम एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए पेड़ लगाने की शुरुआत की। डॉक्टर बैरवा ने बताया कि मैंने अपने परिवार और ग्रामवासियों को सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी पूर्व क्यों हो मिटाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया और हजारों वर्षों से चली आ रही गंगा जी जाने की प्रथा को तोड़ते हुए माता की अस्थियों को वही श्मशान भूमि में एक गड्ढा खोदकर उसमें अस्थियों को डाल दिया और उस पर एक वटवृक्ष लगा दिया साथ ही समाज को एक नया संदेश देकर रूढ़िवादी परंपरा को खत्म करने का आह्वान किया। ताकि ऐसी रूढ़ीवादी परंपराओं से गरीब परिवारों में आर्थिक रूप से बोझ ना पड़े और समाज में एक अच्छा संदेश जाए ताकि सभी लोग प्रकृति के प्रति समर्पित हो।