-निषाद राज का समर्पण देख दर्शकों ने लगाए जय श्री राम के जयकारे
-7 स्थानों पर चल रही रामलीला
-130 वां राष्ट्रीय मेला दशहरा 2023
कोटा, 20 अक्टूबर। 130वें राष्ट्रीय मेला दशहरा- 2023 के तहत नगर निगम कोटा उत्तर और दक्षिण की ओर से शहर में विभिन्न स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। शुक्रवार की रात कलाकारों ने निषादराज राम मिलन, केवट संवाद, सुमंत्र का वापस जाना, दशरथ विलाप, श्रवण कुमार कथा, दशरथ स्वर्ग, कैकेई भरत संवाद, मंथरा का महल से निष्कासन और कैकेई परित्याग की लीला हुई। इस दौरान सीता के जनकपुरी से विदा होने और राम के वन गमन के दृश्यों ने दर्शकों की आँखें नम कर दी।
दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पर राघवेंद्र कला संस्थान द्वारा रामलीला का मंचन किया गया। इस दौरान एसई महेश गोयल, मेला प्रभारी एएक्यू कुरैशी, कनिष्ठ अभियन्ता विनोद मेहरा ने श्रीराम जानकी के प्रतिरूप की आरती की।
रामलीला की शुरूआत निषादराज राम मिलन लीला से हुई। इस प्रसंग में राम, सीता और लक्ष्मण जब वन गमन के लिए प्रस्थान करते हैं तो रास्ते में अयोध्या की सारी प्रजा उनके साथ चलती है। वहीं, निषाद राज से राम जी कहते हैं कि आप अब वापस चले जाइये और राज्य की सीमा की रक्षा कीजिए।
इसके बाद केवट संवाद लीला हुई। इस प्रसंग में जब भगवान राम नदी पार करने के लिए केवट से आग्रह करते हैं कि वह नदी पार करा दें। तब केवट राम जी से कहते हैं कि पहले वह आपके पांव पखारेंगे, फिर नौका से नदी पार कराएंगे।
राम के वन जाने के बाद राजा दशरथ राम के लिए काफी व्याकुल रहते हैं। राम के बिना वह अपने आपको अकेला महसूस करते हैं इसलिए वह अपने मंत्री से कहते हैं कि वह राम को समझा बुझाकर वापस ले आएं। सुमंत्र राम के पास जाकर राजा दशरथ की सारी बात बताते हैं। इस पर राम, सुमंत्र से कहते हैं कि "वह अपने पिता के वचनों के कारण यहां आए हैं। इसलिए मैं वनवास के बाद ही अयोध्या वापस आऊंगा। इस बात को सुनकर सुमंत्र अयोध्या वापस जाकर सारा वृतान्त राजा दशरथ को बताते हैं। इस बात को लेकर वह काफी परेशान रहने लगते हैं।
इसके बाद श्रवण कुमार लीला हुई। इस प्रसंग में एक दिन दशरथ आखेट खेलने के लिए वन जाते हैं। काफी दूर जाने पर उनको कुछ आवाज सुनाई देती है। जिसको सुनकर वह धनुष बाण लेकर उस आवाज के सहारे जाते हैं। जहां उनको पोखर में पानी पीता हुआ एक मृग दिखाई देता है। इसको देखकर वह उस पर बाण चला देते हैं।
जैसे ही वह बाण उनसे छूटता है वैसे ही जोर से आवाज आती है। इसको सुनकर वह उसके पास जाते हैं। जहां पर वह एक युवक को मरणासन्न अवस्था में देखते हैं। उससे सारी बात जानने के बाद वह श्रवण कुमार के माता- पिता से मिलकर पूरी बात बताते हैं। इसके बाद उनके माता- पिता दशरथ से कहते हैं कि "जैसे मुझे अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्यागने पड़ रहे है। वैसे ही पुत्र वियोग में आपको भी प्राण त्यागने होंगे।"
इन प्रसंगों में भरत अपने पिता दशरथ की मृत्यु से आहत हो अपनी मां कैकेई से कहते हैं कि "आपके ही कारण पिता जी का यह हाल हुआ है। इस कारण आप मंथरा को महल से बाहर निकाल दीजिए। पिता की मृत्यु का असली कारण मंथरा ही है। जिसके बाद मंथरा को महल से बाहर कर दिया जाता है।
स्टेशन क्षेत्र में शिव मंडल विकास समिति के द्वारा, ग्राम दसलाना में दसलाना रामलीला आयोजन समिति के द्वारा, केशवपुरा में मनोरथ कला संस्थान के द्वारा, नदीपार क्षेत्र में श्रीराम कला संस्थान के द्वारा, आरकेपुरम में आदर्श नवयुवक रामलीला समिति द्वारा रामलीला मैदान पार्क में, कंसुआ अफॉर्डेबल रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा डीसीएम क्षेत्र में भी रामलीला का मंचन किया जा रहा है।