जोधपुर में केंद्रीय विद्यालय का शिक्षक छात्राओं से अश्लील बातें व हरकतें करता था

जोधपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय के एक शिक्षक को 12 छात्राओं को शारीरिक रूप से परेशान करने के लिए दोषी ठहराया गया है। सभी छात्राएं 15 से 17 साल की उम्र की हैं। केन्द्रीय विद्यालय संगठन, जयपुर के स्थानीय कार्यालय ने आरोपित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रतनाडा पुलिस मुख्यालय को एक पत्र लिखा।

जिसके बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। डीसीपी ईस्ट अमृता दूहन ने मामले के दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है. रतनाडा पुलिस मुख्यालय ने वास्तविक प्रशिक्षक नरेंद्र गहलोत के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की लैंगिक उत्पीड़न व आईपीसी की लज्जा भंग की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार घटना कुछ समय पहले की है। छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी कि शिक्षक नरेंद्र गहलोत उन्हें तंग कर रहे हैं। वह उन्हें अपना टेलीफोन नंबर देकर बात करने के लिए मजबूर करता है और अपशब्द बोलता है। इसके अलावा कुछ छात्राओं ने अपने साथ गलत हरकत का भी आरोप लगाया। इसके बाद विद्यालय स्तर पर जांच करने के बाद जयपुर स्थित प्रादेशिक कार्यालय से पूरा डाटा भिजवाया गया. फिर जयपुर से रतनाडा पुलिस मुख्यालय को एक पत्र लिखा गया, जिसमें आरोपित शिक्षक के खिलाफ प्रदर्शन के बारे में बताया गया, गतिविधि के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर से प्राप्त पत्र में बताया गया है कि स्कूल के कार्यपालक बोर्ड ने इस मामले की गहन जांच की है. सभी 12 बच्चियों ने निंदनीय वास्तविक शिक्षक के खिलाफ आरोपों को फिर से दोहराया था, जिसके बाद बोर्ड ने स्थानीय कार्यालय को एक पत्र लिखकर प्रशिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उसे उत्तरदायी मानते हुए लिखा था। केन्द्रीय विद्यालय संगठन भी अपने स्तर पर प्रबंधकीय कदम उठा रहा है। इसके अलावा पुलिस छात्रा के बयान भी दर्ज करेगी।

गौरतलब है कि जोधपुर सीएम अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। ऐसे में बीजेपी इस मामले को मुद्दा बना सकती है. मारपीट और हमले की घटनाओं से राजस्थान को शर्मसार होना पड़ा है। बहरहाल, सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि मारपीट के कुछ मामले भ्रामक हैं। राज्य में रोजमर्रा की घटनाओं की जांच करने में असमर्थता पुलिस के कामकाज पर सवाल खड़ा करती है।