नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में नवमी तिथि का विशेष महत्व है और इसे महानवमी कहा जाता है। नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन मां के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 2 से 10 साल की उम्र की नौ लड़कियों को पूजा, भोजन और उपहार देकर दुर्गा मां की पूजा की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि 2 से 10 साल की लड़कियों में मां दुर्गा का वास होता है। आइए जानते हैं नवमी के दिन का महत्व-
दो साल की कन्या को कुमारी कहा गया है। इस प्रकार की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट और दरिद्रता का नाश होता है। तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति कहा गया है। भगवती त्रिमूर्ति की पूजा से धन की प्राप्ति होती है। चार वर्ष की कन्या को कल्याणी कहा गया है। देवी कल्याणी की पूजा करने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी माना जाता है।
मां के रोहणी स्वरूप की पूजा करने से जातक के घर परिवार से सभी रोग दूर होते है। छह साल की कन्या को कालका देवी का रूप माना जाता है। मां के कालिका रूप की पूजा करने से सभी क्षेत्रों में ज्ञान, प्रसिद्धि और विजय प्राप्त होती है।
सात साल की बेटी मां चंडिका का स्वरुप है। इस प्रकार की पूजा करने से धन, सुख और विभिन्न प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है। आठ साल की बेटी शांभवी की मां स्वरूप है। इनकी पूजा करने से युद्ध, प्रेमालाप और सफलता में विजय प्राप्त होती है।
नौ साल की कन्या को साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानते है। इस प्रकार की माता की पूजा करने से समस्त विघ्नों का नाश होता है, शत्रुओं का नाश होता है और कठिन कार्यों में भी सफलता प्राप्त होती है। दस वर्ष की कन्या सुभद्रा मानी जाती है। देवी सुभद्रा स्वरूप की पूजा करने से सभी वांछित फल और सभी प्रकार के सुख मिलते हैं।