जयपुर। संसद के पिछले मानसून सत्र के दौरान एक साथ दिखने वाली कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस इस बार शीतकालीन सत्र में शायद ही एक साथ नजर आयें। या यूं कहें कि टीएसमी अब कांग्रेस की अगुवाई में अपने मुद्दे संसद में नहीं रखेगी। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन की द्वारा बुलाई जा रही विपक्षी दलों की मीटिंग में टीएसमी भाग नहीं लेगी। इस बात ममता बनर्जी का यह साफ संकेत जाता है कि वे कांग्रसे पार्टी के लीडरशिप में काम नहीं करेंगी।
इससे पहले भी जब बंगाल मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे पर गई तो उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात नहीं की थी। बनर्जी ने जब नहीं मिलने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा जरूरी तो नहीं कि जब वे दिल्ली आयें तो सोनिया गांधी से मिलें।
हालांकि, टीएमसी ने रविवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया। टीएमसी के एक नेता ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की बुलाई विपक्षी दलों की बैठक में टीएमसी शामिल नहीं होगी। टीएमसी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी शीतकालीन सत्र के दौरान में अलग से कईं मुद्दे लेकर संसद में आयेगी।
बता दें की शीतकालीन सत्र 29 नंबवर से शुरू होने वाला है, और यह 23 दिसबंर तक चलेगा। इस सत्र के दौरान विपक्षी दल खासकर कांग्रसे पार्टी बीजेपी को विभिन्न मुद्दो पर घेरने की तैयारी कर रहें हैं।
यपूी में अखिलेश यादव की मदद करेगी टीएमसी
टीएमसी पार्टी प्रमुख और बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यूपी में भी काग्रेस पार्टी को झटका देने वाली बात कर चुकी हैं। ममता ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी यूपी में बीजेपी को हराती है तो वे अखिलेश यादव की मदद करेंगी।