नवोदय सब. साहि. परिषद के अध्यक्ष एन.के.मेहता के निवास पर आज संस्था की मासिक काव्य-गोष्ठी संपन्न

नवोदय सब. साहि. परिषद के अध्यक्ष एन.के.मेहता के निवास पर आज संस्था की मासिक काव्य-गोष्ठी संपन्न हुई। इस अवसर पर श्री मेहता ने विश्व-पटल पर उभरते तनाव को शान्ति और मानवता के खिलाफ खतरा बताया। उन्होंने ग़ज़ल -'शामे ग़म की कसम...' सुनाकर गोष्ठी का आगाज़ किया। अशफाक अहमद फौजदार ने ग़ज़ल- 'लोगों ने दौलत के वास्ते क्या-क्या नहीं किया पेशकर महफ़िल की फिज़ा बदल दी। बेजोड़ शायर अर्जुन सांखला ने जगजीत सिंह की गजल- दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है सुनाकर महफ़िल में चार चांद लगा दिए।राजेंद्र खींवसरा ने कविता- भटक रही थी ख्वाहिशें..से गोष्ठी में रंग भर दिया।

    
श्याम गुप्ता 'शान्त' ने कुछ सम-सामयिक क्षणिकाएं एवं एक हास्य पैरोडी- हम उस देश के वासी हैं सुनाकर माहौल को खुशनुमा कर दिया। हंसराज बारासा ने कविता- जवानी सपने देखती है सुनाकर वाह-वाही लूटी। राजेंद्र शाह 'राजन' ने मनभावन राजस्थानी गीत-रिमझिम रिमझिम मेहूड़ो बरसे सुनाया।
   
मंझे हुए शायर रजा मोहम्मद ने गजल- बात जो दिल में थी, जबान पर लाई न गई सुनाकर महफ़िल की रंगत बदल दी। ओमप्रकाश वर्मा ने मज़ेदार पैरोडी व क्षणिका- वो महफ़िल क्या जिसमें ताली न हो सुनाकर खूब तालियां बटोरी। एडवोकेट एन.डी. निंबावत ने स्वरचित गीत- ये आंखें झुकी हुई क्यों है, का सस्वर सुंदर पाठ किया। डॉ. महेंद्र जैन ने तलत महमूद का बेहतरीन गीत- तस्वीर बनाता हूं, हू-ब-हू अंदाज़ में पेश किया।
    
सुरीले गायक नंद किशोर भाटी ने- कोई सागर दिल को बहलाता नहीं सुनाकर सबके दिलों को झंकृत कर दिया। श्री एन.के. मेहता की अध्यक्षता एवं श्रीमती अनुराधा अडवाणी की मेजबानी में उक्त कार्यक्रम लगभग तीन घंटे में अपने पड़ाव तक पहुंचा। अंत में श्रीमती अडवाणी ने सभी कवि एवं शायरों को धन्यवाद ज्ञापित किया।