कर्तव्य बोध से राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है – दिलीप सिंह

डीग, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राजकीय महाविद्यालय कामां इकाई द्वारा कर्तव्य बोध दिवस का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के भामाशाह और समाजसेवी अरुण सक्सेना  ने की | मुख्य वक्ता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की भरतपुर जिला कार्यकारिणी के सह-सचिव दिलीप सिंह थे | विषय प्रवर्तन करते हुए महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रोफेसर हरवीर सिंह ने  बताया कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश भर के शिक्षा संस्थानों में ऐसा शैक्षिक पर्यावरण सृजित करने के लिए प्रयत्नशील है, जिसमें कर्तव्य बोध भावना से प्रेरित राष्ट्र भक्त शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर सभ्य समाज और भव्य राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान स्वयं सुनिश्चित कर सकें।

मुख्य वक्ता दिलीप सिंह ने इस अवसर पर कहा कि अपने ज्ञान, विज्ञान और विवेक से विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले स्वामी विवेकानन्द और शौर्य, स्वाभिमान तथा सर्वोच्च त्याग के प्रतीक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती के मध्य प्रतिवर्ष 12 से 23 जनवरी के मध्य कर्तव्य बोध पखवाड़ा आयोजित किया जाकर महाविद्यालयों में कर्तव्य बोध दिवस मनाया जाता है | महासंघ का ध्येय वाक्य “राष्ट्र के लिए शिक्षा, शिक्षा के लिए शिक्षक और शिक्षक के लिए समाज”  का त्रिसूत्र है | इसका ध्येय और उद्देश्य ही यही है कि शिक्षा राष्ट्र की उन्नति का सर्वोच्च और सशक्त माध्यम बनें | शिक्षक समुदाय का यह कर्तव्य है कि शिक्षा ऐसी हो जो विद्यार्थियों में राष्ट्र सेवा और समर्पण के भाव जागृत कर सके। यदि विद्यार्थियों और शिक्षकों में कर्तव्य बोध की भावना जागृत हो सकी तो हमारे महान राष्ट्र का गौरव पुन: स्थापित हो सकेगा | राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है किन्तु शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग विद्यार्थी ही हैं |

यदि विद्यार्थियों में कर्तव्य बोध की स्वत: स्फूर्त भावना का संचार होगा तो राष्ट्र को प्रगति पथ पर चलने से कोई नहीं रोक सकता | विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे शिक्षा के समग्र को ग्रहण कर उसका उपयोग सर्वप्रथम राष्ट्र, तत्पश्चात समाज और अंत में अपने लिए करें | अध्यक्षीय वक्तव्य में अरुण सक्सेना ने सभी से कर्तव्य निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में प्रोफेसर सुदर्शन गोयल, प्रोफेसर प्रज्ञा चौधरी, सचिन पालीवाल उपस्थित रहे । संचालन  प्रोफेसर अमन बंसल ने किया ।