संवाददाता धर्मेन्द्र सुवालका
हिण्डोली बून्दी राजस्थान
कंधे पर उठाई अर्थी, दी मुखाग्नि
बाबाजी का बरड़ा हिंडोली में 95 वर्षीय पिता की मृत्यु के बाद पुत्र ना होने की स्थिति में बेटियों ने पिता की अंतिम क्रिया कर बेटे का फर्ज निभाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाबाजी का बरड़ा हिंडोली निवासी 95 वर्षीय रामदेव कलाल की आज मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद पुत्र ना होने की स्थिति में पुत्रियों ने अंतिम संस्कार करने की मंशा समाज के सामने रखी। हिंडोली के कलाल समाज के गणमान्य एवं बुजुर्ग लोगों द्वारा सहमति जताने के बाद सातों पुत्रियों कमला सुवालका, मोहिनी सुवालका, गीता , मूर्ति सुवालका, पूजा सुवालका, श्यामा सुवालका व ममता सुवालका ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। शव यात्रा के दौरान पुत्रियों ने अपने पिता को कंधा दिया और मुक्तिधाम जाकर मुखाग्नि दी।
इस अवसर पर समाज के प्रबुद्ध व्यक्ति भी साथ रहे। समाज बंधुओं ने बताया कि पुरानी परंपराओं को तोड़कर वर्तमान के अनुसार समाज को दिशा देनी आवश्यक है। पुत्र और पुत्री में कोई अंतर नहीं होता। मंगलवार को इन बेटियों ने इस बात को साबित किया है की पुत्रियों का अधिकार केवल उनकी जायदाद पर नहीं बल्कि अंतिम संस्कार पर भी होता है।