संवाददाता सुमेर सिंह राव
उदयपुरवाटी / चंवरा
मंगलवार को हुआ हवन, अब होगी गौशाला मंदिर में विभिन्न मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा व भंडारे का आयोजन
बामलास धाम के महंत बाबा लक्ष्मणदास महाराज के सानिध्य में हीरवाना गौशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा एवं रात्रिकालीन नानी बाई रो मायरो कथा का मंगलवार को समापन किया गया। कथा के समापन से पूर्व पंडित अश्विनी शर्मा के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया। महंत लक्ष्मण दास महाराज ने बताया कि बुधवार को गौशाला मंदिर में राधा कृष्ण, शिव परिवार, विश्वकर्मा, बजरंगबली व सरस्वती माता की मूर्तियों की पंडित अश्विनी शर्मा के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के साथ प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। महाआरती के पश्चात प्रसाद का भोग लगाकर आए हुए श्रद्धालुओं को भंडारे का प्रसाद वितरण किया जाएगा। कथावाचक रामानंद महाराज ऋषिकेश ने कथा के अंतिम दिन भगवान श्री कृष्ण के 16108 विवाहों का वर्णन, सुदामा चरित्र, नवयोगेश्वर संवाद, 24 गुरुओं की कथा सुनाई। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि मित्रता करनी है तो कृष्ण और सुदामा जैसी करनी चाहिए। एक राजा था और एक गरीब फिर भी भगवान कृष्ण ने सुदामा को अपने बराबर बैठाया और अपने आंसुओं से सुदामा के पैर धोए तथा महल धन देकर अपने मित्र का मान बढ़ाया। पंडित कैलाश सारस्वत ने अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो मिलने सुदामा गरीब आ गया है भजन सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। शाम को कथा का समापन किया गया। रात्रि कालीन नानी बाई रो मायरो कथा में भक्त नरसी की करुण पुकार पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरसी की बेटी के ससुराल में भात भरा गया। कथा में गोरसिया परिवार द्वारा मायरा भरने की रीत निभाई गई। मायरे में शांवल शाह राधाकृष्णन नरसी मेहता की झांकियां सजाई गई। रात्रि में कथा का समापन किया गया। कथावाचक ने कहा कि जिस प्रकार से भक्त नरसी ने भगवान के नाम पर अपना सब कुछ लुटा दिया था कहते हैं परमात्मा अपने ऐसे भक्तों की हमेशा लाज रखते हैं। भगवान ने नानी बाई के ससुराल में भात भरकर भक्त नरसी की लाज बचाई। इस कार्यक्रम के आयोजक विश्वनाथ शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी संतोष देवी गोरसिया परिवार द्वारा भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान मनमोहन दास त्यागी नैमिषारण्य धाम उत्तर प्रदेश, शंकर दास वनखंडी धाम, रघुनाथदास मोरिंडा धाम, जय किशनदास झाड़ीवाले, विक्रम सिंह शेखावत, विपुल दास दोसा, आचार्य विपुल कृष्ण, गंगाराम लंबोड़, बनवारी लाल जांगिड़, हीरालाल मास्टर, सुमेर रावत, गिरधारी रावत सहित काफी संख्या में महिला एवं पुरुष मौजूद रह