विशेष आलेख - 26 नवंबर संविधान दिवस

भारतीय संविधान में निहित मूल्य भारत के लिए बेहद उपयोगी

मदन मोहन भास्कर
लेखक एवं पत्रकार
हिण्डौन सिटी, करौली, राजस्थान
मो.9783900300

संविधान दिवस क्या है

प्रत्येक देश का अलग-अलग संविधान होता है और संविधान नियम और कानूनों की एक पुस्तक होती है जिसके आधार पर देश का शासन चलाया जाता है उसी प्रकार से भारत का अपना खुद का लिखा हुआ संविधान है । भारतीय संविधान के जनक डॉ. भीमराव अंबेडकर को आजादी के बाद कानून मंत्री का पद दिया गया तथा उन्हें भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन किया तथा प्रत्येक देश के संविधान से सभी वर्ग के नागरिकों के संपूर्ण विकास के लिए गुणवत्ता युक्त तत्वों को इकट्ठा करके भारतीय संविधान का निर्माण किया तथा उसे सरकार के सामने प्रस्तुत किया। भारतीय सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया ।

संविधान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है

भारत सरकार ने नवंबर 2015 में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना 19 नवंबर, 2015 को जारी की गई थी। भारत का संविधान दिवस पहली बार वर्ष 2015 में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारत के नागरिकों में संविधान के प्रति जागरूक करने और संवैधानिक मूल्यों को याद दिलाने के लिए संविधान दिवस मनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगो को संविधान के बारे में जागरूक करना,उनके अधिकारों और उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना,कोई किसी के साथ अन्याय न कर सके, इस बात को सुनिश्चित करना,किसी के साथ जाति, धर्म, लिंग, सम्प्रदाय या किसी प्रकार से कोई भेद भाव नहीं करना,सबको समान अधिकार दिलाकर गरीबों के हितो को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के नये क़ानून बनाना ताकि उन्हें बुनियादी सुख-सुविधायें मिल सके। संविधान की वजह से लोग गरीबों का शोषण नहीं कर पाते है। संविधान कमजोरो के हितों की रक्षा करती है। कोई कितना भी बड़ा या ताकतवर हो, हर कोई संविधान से डरता है। संविधान समाज में संतुलन बनाता है। संविधान ही है जो एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार शोषितों के ढाल बनकर हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं।

भारतीय संविधान कितने समय में,कैसे बना एवं कितना खर्चा आया

भारतीय संविधान को बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।संविधान के आधार पर ही देश की संसद कानून बनाती है, जिससे देश की पूरी व्यवस्था चलती है। 26 नवंबर, 1949 में बनकर तैयार हुए संविधान को 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश को आजादी मिलने से पहले ही स्वतंत्रता सेनानियों ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी थी कि आजाद भारत का संविधान कैसा होगा। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में हुई थी। संविधान सभा की पहली बैठक में कुल 207 सदस्य शामिल थे। उस समय संविधान को बनाने में लगभग 1 करोड़ रुपये का खर्च आया था।

हर जाति,धर्म के हितों की रक्षा हो ऐसा विधान है,
सबको जोड़कर रखे ऐसा भारत का संविधान है।

कैसी दिखती है मूल प्रति

संविधान की मूल प्रति 16 इंच चौड़ी, 22 इंच लंबे चर्मपत्र शीटों पर 251 पृष्ठ पांडुलिपि में लिखे गये है। संविधान की असली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हाथ से लिखी थी। ये बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखी गई है। इसके हर पन्ने को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था। संविधान की असली प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी दो भाषाओं में लिखी गई थीं। इन्हें आज भी भारत की संसद में हीलियम भरे डिब्बों में सुरक्षित रखा गया है।

लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रन्थ ही संविधान है,
जिसने भी संविधान को पढ़ लिया वही इंसान विद्वान है।

भारतीय संविधान और संविधान मसौदा समिति के सदस्यों के जनक

डॉ. बी.आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान के जनक के रूप में जाना जाता है। भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए संविधान सभा द्वारा एक मसौदा समिति का गठन किया गया था। इस समिति में सात सदस्य शामिल थे जिनमें डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, कन्हैयालाल मानेकलाल मुंशी, एन. गोपालस्वामी अयंगार, बी.एल. मिटर, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, मोहम्मद सादुल्लाह और डीपी खेतान शामिल थे। भारत के संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ अंबेडकर ही जिनको 1947 में संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। ये स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री थे। उन्होंने एक संविधान के साथ आने के लिए विभिन्न बातों को ध्यान में रखा जो सभी के साथ समान व्यवहार करने और एक बेहतर राष्ट्र के लिए लक्ष्य निर्धारित करने का उपदेश दिया।

विश्व में सबसे बड़ा लिखित संविधान

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसके कई हिस्से यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान के संविधान से लिये गये हैं। इसमें देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, सरकार की भूमिका, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री की शक्तियों का वर्णन किया गया है। विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का क्या काम है, उनकी देश को चलाने में क्या भूमिका है, इन सभी बातों का जिक्र संविधान में है।
संविधान लागू होने के समय इसमें 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे, जो वर्तमान में बढ़कर 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 25 भाग हो गए हैं। साथ ही इसमें पांच परिशिष्ठ भी जोड़ दिए गए हैं, जो कि प्रारंभ में नहीं थे। हाथ से लिखे हुए संविधान पर 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। दो दिन बाद 26 जनवरी से यह संविधान देश में लागू हो गया था। संविधान 25 भागों, 470 अनुच्छेदों और 12 सूचियों में बंटा भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

मदन मोहन भास्कर
लेखक एवं पत्रकार
हिण्डौन सिटी, करौली, राजस्थान
मो.9783900300