स्ववित्त पोषित प्राइवेट स्कूलों के साथ हो रहे अन्याय को तत्काल रोका जाए
-प्राईवेट स्कूल ऐसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जिला कलक्टर को ज्ञापन
बारां, 4 मार्च। प्राईवेट स्कूल ऐसोसिएशन द्वारा सोमवार को जिलाध्यक्ष मुकेश शर्मा क्वांटम की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें जिले सहित राज्य में स्ववित्त पोषित प्राइवेट स्कूलों के साथ हो रहे अन्याय को तत्काल रोकने की मांग की गई। ज्ञापन में राजेश मान, हरिमोहन गोयल, प्रमोद शर्मा, सीएल मेरोठा, प्रद्वाम्न वर्मा, सत्येंद्र शर्मा, मोहनलाल प्रजापति, रूपल सेठी, हितेश खंडेलवाल, योगेंद्र शर्मा, सिद्धार्थ टेहल्यानी,, सत्येंद्र कश्यप, इसराज खान, प्रहलाद मेरोठा, राजेंद्र नागर, बनवारी चकेनवाल, शिवकुमार नागर, राकेश सोनी, तेजेंद्र चौधरी व गौरव गर्ग आदि पदाधिकारियों बताया कि राज्य में 40 हजार से अधिक गैर-सरकारी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 90 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 7 लाख से अधिक कार्मिक कार्यरत हैं।
इन स्कूलों को न तो राज्य सरकार से कोई वित्तीय सहायता मिलती है और न ही किसी प्रकार की कोई सुविधा यथा मुफ्त ड्रेस, मुफ्त पुस्तकें, मिड डे मील और न ही स्कूलों के छात्रों को छात्रवृत्ति प्राप्त होती है। देश की स्वाधीनता के बाद से ही राज्य की स्कूल शिक्षा में गैर-सरकारी विद्यालयों की सराहनीय एवं अग्रणी भूमिका रही है। राज्य के आर्थिक विकास एवं रोजगार उपलब्ध करवाने में भी इन विद्यालयों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ भेद-भावपूर्ण व्यवहार एवं उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप इन विद्यालय के संचालकों, शिक्षकों एवं अभिभावकों में असंतोष उत्पन्न हो रहा है।
जिला मीडिया प्रभारी राजेश पंकज ने बताया कि बोर्ड एवं स्थानीय परीक्षा के दौरान विद्यालयों की गैर जरूरी जांच करवाने के लिए निदेशालय प्रारम्भिक शिक्षा, राज. बीकानेर द्वारा 21 फरवरी को जारी किए गए आदेश से स्कूल संचालकों में आक्रोष बना हुआ है। आदेश में सभी गैर-सरकारी विद्यालयों की 21 प्रकार की जांच करने तथा किसी दस्तावेज के उपलब्ध न होने पर तत्काल मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही का उल्लेख है। जिसे निदेशालय ने सरकार की 100 दिवसीय कार्य योजना का हिस्सा बताया है। जबकि निदेशालय का यह बताना स्पष्ट रूप से गलत एवं भ्रामक है। वर्तमान में विद्यालयों में बोर्ड एवं स्थानीय परीक्षा चल रही हैं या परीक्षा की तैयारी चल रही है। ऐसे अवसर पर सभी गैर-सरकारी विद्यालयों की 21 प्रकार की जांच कराना कैसे सही हो सकता है।
जबकि कुछ समय पूर्व ही आर.टी.ई. के तहत निःशुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की जांच के दौरान सभी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। फिर अचानक परीक्षा के दौरान जांच के आदेश जारी करना निदेशालय की दुर्भावना को दर्शाता है। जांच के कुछ बिन्दु गैर-सरकारी विद्यालयों की स्वायत्तता का उल्लंघन करते हैं, जबकि संविधान एवं उच्च न्यायालय निर्णयों में गैर सरकारी विद्यालयों को काफी हद तक छूट दे रखी है, क्योंकि वे स्व वित्त पोषित होते हैं।
ज्ञापन में मांग की गई है कि राज्य सरकार निष्पक्ष, सद्भावना एवम उदारता पूर्ण व्यवहार करते हुए समस्याओं का शीघ्र समाधान करें, ताकि स्कूल संचालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि आदेश को वापस नहीं लिया गया तो जिले के सभी निजी स्कूलों का संचालन बंद करने जैसा आंदोलनात्मक कदम उठाया जाएगा।