बूंदी: वेतन का इंतजार करती आंगनबाड़ी कर्मचारी

ब्यूरो चीफ शिव कुमार शर्मा

बूंदी राजस्थान

बून्दी 5 मार्च। एक बार फिर से आंगनबाड़ी कर्मचारियों के मानदेय पर सरकार कुंडली मारकर बैठी है जी हां तीन माह पूरे हो गए हैं चौथा महीना भी शुरू हो गया है ऐसे में कार्मिक बहनों के रंगों का त्योहार होली भी फ़ीका पड़ता हुआ दिख रहा है यह हाल है आंगनबाड़ी कर्मचारियों का जिनको पहले ही मात्र 287 रुपय प्रतिदिन के हिसाब से 8600 मानदेय मिलता है मिनी केंद्रों, सहायिकाओ का और आशा बहनों का तो इससे भी कम है ऐसे में आप सोच सकते हो कि तीन माह से उनका मानदेय रुका हुआ है उनके घर परिवार की क्या स्थिति  हो रही होगी सर्वविदित है कि आंगनबाड़ी कर्मचारी बहने ज्यादातर विधवा ,परित्यक्ता या गरीबी रेखा से नीचे की बहने हैं ऐसे में मानदेय भुगतान को लेकर विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं भी नहीं रेंगती ,जबकि विभागीय नियमावली यह कहती है कि जब तक आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय जमा नहीं हो जाता तब तक महिला बाल विकास का अधिकारी  वेतन नहीं उठा सकते । आला अधिकारी, हमारी सरकार क्या हमारी आर्थिक परेशानी को नहीं समझती ऐसी स्थिति में एक आदर्श आंगनबाड़ी का सपना देखना बहुत मुश्किल है विपदा यह भी है कि हम कार्मिकों की 10:00 से 2:00 बजे तक तो केंद्र पर फिर 2 घंटे गृह संपर्क पर जाने के बाद यानी कि 6 घंटे सरकार का कार्य करने के बाद हम कोई दूसरा काम धंधा अपने परिवार को चलाने के लिए नहीं कर सकती क्योंकि समय बचता ही नहीं है ऐसे मे हमारी आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है और फिर 40 -40 सालों से सरकारी कार्यों को करते रहने के बाद भी सरकारी नौकरी का दर्जा देना तो दूर हमारी सेवा का मानदेय समय पर देना  वह भी जरुरी नहीं समझती । ओर हमारी समस्या सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती उसके ऊपर सरकार तरह तरह के समुदाय आधारित कार्यक्रम करवाती है जिसमें हर माह 500 रु की राशि तक कार्यकर्ता को जेब से खर्च करने पड़ती है स्मार्टफोन में चल रहे हे विभिन्न तरह के विभागीय एप्स जिसको भी कार्मिक अपनी जेब से पैसा खर्च करके रिचार्ज करवा कर चला रहे हैं औरआंगनबाड़ी केंद्र आज भी किराए से चल रहे हैं ओर किराया मात्र 200 रु सरकार देती है जिनका किराया भी कार्मिक अपनी जेब से दे रहा है क्योंकि बहुत माह से किराया भी खातों में जमा नहीं हुआ है क्या क्या बताएं हम हमारी स्थिति बहुत दयनीय है सन 2019 और 2020 के गरम पोषाहार और नाश्ता के बिल भी पूरे पूरे जमा नही हुए विभागीय अधिकारियों से पूछने पर संतोष जनक उत्तर नही मिलता ओर विभाग हम कर्मचारियों से काम तो लेता है सेवा लेता है लेकिन सेवा के बदले मानदेय समय पर  नहीं देता है 

भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष और आंगनबाड़ी कर्मचारी शेफाली भटनागर ने बताया कि.......शहर में ही नही राज्य में देश मे आंगनबाड़ी कार्मिक सिर्फ महिलाएं ही हैं और उनका इतना शोषण... ऐसे में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने  की औपचारिकता क्यों करना जबकि उनकी स्थिति सरकार ने इतनी दयनीय कर रखी है