कोटा /जयपुर 15मार्च। राजस्थान विधानसभा में स्वायत्त शासन की मांग पर विधायक संदीप शर्मा ने कोटा शहर के बदहाल सडकों, पार्को, नालीयों व सफाई व्यवस्था ठीक करने की मांग कि विधायक ने सदन में बताया कि किस तरह लोग मूलभूत समस्या से जुंझ रहे है। कोटा में विकास कार्यो के चलतें सैकडों लोगो को इस विकास के बदले में लोगों को बली चढानी पडी है। इन अव्यवस्थित और जल्दबाजी के विकास कार्यो के चलतें कोटा शहर में वर्ष 2022 में 444 सडक हादसें हुए जिसमें 111 लोगों की मौत हुई जबकि वर्ष 2021 में 365 सडक दुर्घटनायें हुई और 75 लोगों को अकारण काल का ग्रास बने। ऐसे विकास कार्य से कई महिलाएं विधवा हो गयी और कई बच्चे अनाथ हो गयें। वृद्व बेसहारा हो गयें। नगर विकास न्यास द्वारा स्मार्ट सिटी के करोडों रूपयों को बर्बाद किया गया। वर्तमान में न्याय द्वारा बनायें गयें फ्लाई ओवर अंडर ब्रिज है जो तकनीकी रूप से सही नही है जिसमें हॉल ही में एक 16 वर्ष के बच्चे की बलि चढ़ गई। लोगो को सुगम राहो को दुर्गम स्थलों में बदल दिया गया। न्यास द्वारा अंडर ब्रिजों में पानी भरा रहता है। नगर विकास न्यास कोटा केवल नई नई कॉलोनियां काट कर राजस्व इकठ्ठा करने का कार्य कर रहा है। परन्तु न्यास व निगम में हस्तांतरित की गयी कॉलोनियों में लोगों को आधार मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड रहा है।
विधायक ने कहा राज्य सरकार द्वारा कोविड व अन्य आपदाओं के कारण प्लांट आवटी राशि जमा नही करा पायें उनको राज्य सरकार द्वारा ब्याज पेलेन्टी में छूट दी गयी है ताकि लोग प्राकृतिक आपदा के बाद मूलधन जमा करा कर प्लांटों का आवंटन ले सके परंतु कोटा न्याय के कुछ अधिकारीयों की हट धर्मिता के चलतें राज्य सरकार के आदेशो की अवहेलना की जा रही हैं। लोगों से ब्याज पेलेन्टी पूरी वसूली जा रही है। जिससें सरकार द्वारा दिया गया उचित लाभ लोगों को नही मिल पा रहा है।
विधायक ने मंत्री से कहा कि आपके द्वारा पूर्व में कोटा विकास प्राधिकरण बनाने की घोषणा अधूरी पडी है।
कोटा क डेवलब्पमेंट आर्थोरिटी बनाने का वायदा बार बार आपको दिलाया है आपका आज जवाब में बताना चाहिए कि आप के0डी0ए0 की क्या रूपरेखा तैयार की है। कोटा में एयरपोर्ट बनाने के लिये विभाग द्वारा सार्थक प्रयास नही किये जा रहे है। आपने चौरायों का डायामीटर इतना बड़ा कर दिया कि ट्रेफिक में विजीलिटी नही रही, दिल्ली, जयपुर, बैंगलोर में चौराहों को छोटा कर आवागमन को सुगम किया जा रहा है। आज कोटा में जाम की स्थिति नजर आने लगती है। इन चार वर्षों में लोगो की मूलभूत सुविधाओं का कोई ध्यान नहीं रखा गया।
विधायक ने नगर निगम के बारे में बतातें हुए कहा कि कोटा नगर निगम को हिस्सों में बांट दिया गया है। कोटा उत्तर नगर निगम , कोटा दक्षिण नगर निगम। वर्तमान में कोटा उत्तर के पास भवन नही होने की दषा में एक ही स्थान पर दोनो नगर निगम का कार्यालय चल रहा है। कोटा नगर निगम वर्तमान में दुर्दषा के उच्च स्तर से गुजर रही है। पहले तो 2 करने की आवश्यकता ही नही। दिल्ली जैसे महानगर में 1 ही नगर निगम MCD से कार्य कराये जाते है। फिर अधिकारी कर्मचारियों का संतुलन कही कम कही ज्यादा। उत्तर में सिर्फ बोर्ड बनाने हेतु आपने कोटा निगम का जो वार्डों का परिसीमन किया है। उसमें व्यवस्थायें चौपट हो गई, छीन्न भिन्न हो गयी। आप नगर निगम उत्तर का कार्यालय 40 करोड की लागत से बना रहे है। नगर निगम बनाने का गलत निर्णय जब ठीक किया जायेगा तो जनता के 40 करोड रूपय की लागत से बना ये उत्तर निगम का कार्यालय किस काम आयेगा। व्यर्थ ही जनता के पैसों की बर्बादी होगी। कोटा में सफाई व्यवस्था को लेकर निगम द्वारा 60 करोड का बजट लेने के बाद भी लोग परेषान है। स्मार्ट शहर कोटा में सफाई व्यवस्था पूरी तरीके से फैल साबित हो रही है। करोडों रूपय खर्च करने के बाद भी गंदगी से लोगों निजात नही मिल पा रही है। निगम इस ओर कोई ठोस योजना नही बना पा रहा। नाले , नालियां सड रहे है। गलियों में सडको पर कचरे के ढेर पडे रहतें है। शहर के मुख्य मार्गो पर कचरे के ढेर पडे रहतें है। कचरे का ठीक प्रकार से संग्रहण नही किया जा रहा है। वर्तमान में संचालित कचरे की गाडियों में गीला व सूखा कचरा ठीक इकट्ठा नही किया जा रहा है। वार्डों में पर्याप्त सफाई कर्मी नही है। कोटा में टेचिंग ग्राउड पर कचरे के ढेर जमा है। जमा कचरे से आस पास के 3 किलो मीटर क्षैत्र में जल, वायु और थल प्रदूषित हो रहा हैं जिससें कोटा में प्रदूषण बढ रहा है। कई बार तो संवेदक द्वारा कचरा जला कर निस्तारण किया जाता है। जिससे आस पास के लोगो का जीना दुश्वार हो जाता है। नालों की सफाई के दौरान निकले मलबे का ठीक प्रकार से निस्तारण नही हो पाता। और परिणाम स्वरूप करोडों रूपय खर्च करने के बाद भी कोटा दोनो नगर निगम स्मार्ट सिटी स्वच्छता की रैंकिंग में पिछता जा रहा है। शहर में सडकों, गलीयों व पार्को में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नही है। कोटा नगर निगम क्षैत्र में 40 हजार रोड लाईटे लगी हुई है जिसमें से अधिकांष लाइटें बंद पडी है। हिन्दु धर्म में गाय को माता के रूप में पूजते है परन्तु कोटा नगर निगम द्वारा संचालित गायों की बहुत बुरी दुर्दशा है। इस गौशाला में गायों को पर्याप्त आहारा नही मिल पाता और इस गोैषाला में गायों को रखने की भी क्षमता कम है। गायों को इस गौशाला में ढूंस ढूंस कर रखा जा रहा है। घायल गायों का इलाज भी ठीक प्रकार से नही होता है। स्ट्रीट डॉग का आतंक इतना है कि छोट छोटे बच्चें आये दिन गंभीर घायल हो रहे है। नित्य इन स्ट्रीट डॉगस द्वारा किसी वृद्व, महिला व बच्चों पर हमले कर गंभीर रूप से घायल कर रहे है। कोटा दक्षिण निगम में पार्क बदहाल पडे है। पार्को में पर्याप्त झूले व बैचे नही है नाहि योगभवन हैं। पिछले कार्यकाल में माली पाको सहजते थें। आज पार्को की दुर्दषा बुरी हो गयी है। मेरी विधान सभा में 500 से अधिक पार्क है जो बिना देख रेख के उजडे पडे है। दक्षिण नगर निगम कोटा में उत्तर के मुकाबलें में स्टाफ कम है। वर्तमान में पर्याप्त अभियंता भी रही है नाहि ही सफाई कर्मी। 50 से भी अधिक कर्मचारी इसी महिनें सेवा निवृत्त हो जायेगें। आयुक्त का स्थाई पद पर पदस्थापित नही है। हर वार्ड में सफाई कर्मी भी कम है। कोटा नगर निगम दक्षिण में महापौर को शक्ति विहीन बना रखा है। कोई अधिकार नही दिये गयें। नगर निगम दक्षिण में कार्य विभाजन के लिये समितियों का गठन किया गया परन्तु समितियों के पास कोई अधिकार नही है और कोटा नगर निगम उत्तर में तो आज तक समितियों का गठन ही नही हुआ। नगर निगम की बैठक में वार्डो में निर्माण कार्य हेतु 120 करोड निर्माण कार्य करवाने के लिये प्रस्ताव लिये गयें । परन्तु आपकी स्वीकृति के बिना संपूर्ण विकास ठप पडा है। आपके द्वारा प्रत्येक वार्डो में 1-1 करोड रूपय के कार्य करवायें गयें। जिसमें कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी की अनुसंषा पर 50 लाख के कार्य कराये गयें । ये कौन सा नियम है आपके द्वारा आपके विभाग में मनमाने तरीके से नया नियम बना कर कार्य कर रहे है।
वर्तमान में पार्षदों का मानदेय बढाने की आवश्यकता है। सरकार द्वारा फुटकर व्यापारियों के लिये स्थाई जगह आवंटित नही की नाहि इस ओर सार्थक प्रयास किये गयें। अतिक्रमण हटाने के नाम पर खुल लूट चल रही है। सरकार द्वारा चम्बल के सोदर्यीकरण का तो कार्य करवाया जा रहा है। परन्तु चम्बल शुद्वीकरण के कार्य के लिये सार्थक प्रयास नही किये जा रहे है आज भी कई गंदे चम्बल नदी में गिर कर चम्बल नदी के पानी को गंदा कर रहे है। आपके द्वारा झूठी झूठी बातें बोली गई की बरसात के दिनों में बाढ़ आनें से इस रिवर फ्रंट पर कोई असर नही होगा परन्तु गत वर्ष बरसात के दिनों में किस तरह पानी से इस रिर्वर फ्रंट का बुरा हाल हुआ और कई जगह से इसकी क्षति हुई, दीवारें टूट गई, पर्श उखड गया, जोधपुर का बेष कीमती पत्थर जगह जगह टूटा पडा हुआ था। जो आज भी उसका कार्य पूर्ण नही हो पा रहा है। आर.यू.आई.डी.पी. व नगर विकास न्यास द्वारा सीवरेज की पाईप लाईनें डाली गयी। इन पाईप लाईनें डालते समय कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कई लोग अकारण मौत का शिकार हुए। परन्तु सीवरेज पाईप लाईन डालने अधिकारीयों व ठेकेदारों की मिलीभगत का भ्रष्टाचार का खुला खेल है। ठेकेदार द्वारा जो सीवरेज पाईप लाईनें डाली है वों निर्धारित मापदंडों से की उपेक्षा कर कम गुणवत्ता की पाईप लाईनें बिछाई गई है। इस संबध में अधिकारीयों ने आंखें बंद की हुई है। ये भी एक जांच का विषय है। करोडों रूपया भ्रष्ट्राचार की भेट चढ चुका है बहुत बडी आवश्यकता है सीवरेज को को दुरूस्त करनें की आवश्यकता है। कई सडके उखडी पडी हुई है, सीवरेज के ठेकेदार को पेमेंट नही दिया तो वह काम छोडकर चला गया। लोग दुर्घटना ग्रस्त हो कर अस्पतालों में इलाज करवा रहे है। कोटा नगर विकास न्यास कोटा में जो अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आयें है। उनसें अधिशाषी अभियंता का कार्य करवाया जा रहा है। विभाग में पदोन्नति के द्वारा चयनित अधिशाषी अभियंताओं से सहायक अभियंताओं का कार्य करवाया जा रहा है। वही दूसरी ओर न्यास में 29 अधिशाषी अभियंता पदस्थापित है जबकि कनि. अभियंता 15 भी नही है। ऐसी स्थिति में एक कनि. अभियंता दो दो अधिशासी अभियंताओं के पास कार्य कर रहा है जिससे कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। अति मुख्य अभियंता का पद रिक्त पडा हुआ है।
विधायक ने मांग कि कोटा वासियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नही रखा जाए और लोगों की मूल सुविधायें उपलब्ध करवाना ही विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए।