डा. भीमराव अम्बेडकर भारतीय संविधान के जनक थे :- मंगल चन्द सैनी तहसीलदार (रि.)

सुमेर सिंह राव

14अप्रैल 1891को मध्यप्रदेश के महू सैन्य छावनी में एक दलित परिवार में महामानव दलितों के उद्धारक डा. भीमराव अम्बेडकर का जन्म हुआ। वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे किन्तु उस वक्त की सामाजिक व्यवस्था के कारण आगे बढ़ने में उन्हें कदम कदम पर समस्याओं का सामना करना पड़ा। सात नवंबर 1900को उन्होंने प्रथम कक्षा में प्रवेश लिया इस दिन को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है। तमाम कठिनाइयों के बावजूद अमरीका व लंदन में उन्होंने अपनी कालेज शिक्षा पूर्ण की जिसका खर्चा बड़ौदा राज्य से छात्रवृत्ति के तौर पर मिलता था।
वे कहा करते थे छुआ छूत गुलामी से भी बदतर है। उन्हें महाराजा गायकवाड़ का सैन्य सचिव नियुक्त किया गया किन्तु जातिगत भेदभाव के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी दलितों के अधिकारों को उन तक पहुंचाने के लिये उन्होंने पाँच पत्रिकायें निकाली यही नहीं आंदोलन सत्याग्रह जुलूसों के के माध्यम से अम्बेडकर नए अछूतों के मन्दिर में प्रवेश सभी वर्गों के लिये पेयजल उपलब्धि जैसे संघर्ष किये। डा अम्बेडकर ने अछूतों के लिये पृथक निर्वाचिका बनाने की मांग की जिसका महात्मा गाँधी ने यरवदा जेल में बैठे विरोध किया और मरण व्रत रखा।
भारत के स्वतंत्र होने के बाद गणतंत्र की बारी थी जिसके लिये एक संविधान चाहिऐ बाबा साहब की अध्यक्षता में संविधान निर्मात्री संस्था का निर्माण किया गया। अम्बेडकर ने 60 देशों के संविधानों का गहराई से अध्ययन किया था। सभा के अन्य सदस्य विभिन्न कारणों से समय नहीं दे पा रहे थे फलस्वरूप संविधान निर्माण का पूरा भार अम्बेडकर पर आगया। उन्होनें कठिन मेहनत कर दो वर्ष 11माह 17दिन में भारत के संविधान को तैयार किया। भारत का संविधान विश्व के सर्वश्रेष्ठ संविधानों में शुमार किया जाता है l
भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकार किया गया व 26जनवरी 1950 को लागू किया गया। डा भीम राव अम्बेडकर ने नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी धर्म की स्वतंत्रता छुआ छूत खत्म करना महिलाओं के लिये विशेष अधिकार व अनुसूचित जाति जनजाति के लिये नौकरियों व लोकसभा के साथ विधानसभा में आरक्षण की व्यवस्था संविधान के द्वारा सुनिश्चत की।