जस्टिस यूयू ललित बने भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति भवन में ली सपथ

जयपुर। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने आज भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज सुबह राष्ट्रपति भवन में न्यायमूर्ति ललित को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति एनवी रमना के सर्वोच्च न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने भारत के मुख्य न्यायधीश के रूप में सपथ ली है।

बता दें की न्यायमूर्ति रमना ने परंपरा और वरिष्ठता के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति ललित को उनके उत्तराधिकारी के रूप में सिफारिश की थी। राष्ट्रपति ने बाद में न्यायमूर्ति ललित की भारत के नए मुख्य न्यायाधीश या सीजेआई के रूप में नियुक्ति की पुष्टि की। न्यायमूर्ति ललित का भारत की न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में 74 दिनों का संक्षिप्त कार्यकाल होगा और 8 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे।

न्यायमूर्ति रमना के विदाई समारोह में कल न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि लगभग तीन महीने के अपने कार्यकाल के दौरान वह तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक मामलों की सूची को सरल, स्पष्ट और यथासंभव पारदर्शी बनाना होगा।

न्यायमूर्ति ललित ने एक स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी वादा किया है जहां शीर्ष अदालत की संबंधित पीठों के समक्ष किसी भी जरूरी मामले का स्वतंत्र रूप से उल्लेख किया जा सकता है। 

जस्टिस ललित ने कहा, "मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका स्पष्टता, निरंतरता के साथ कानून बनाने की है, और इसे करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जहां भी मामलों को संदर्भित किया जाता है, जितनी जल्दी हो सके बड़ी बेंचें हों। इस तरह की बेंचें ताकि मुद्दों को तुरंत स्पष्ट किया जा सके, मामले में निरंतरता हो और लोगों को अच्छी तरह से पता हो कि कानून में अजीबोगरीब स्थितियों की रूपरेखा क्या है।"