Kota: सरकार शहीदों की शहादत के प्रति बेपरवाह- संदीप शर्मा

ब्यूरो चीफ शिव कुमार शर्मा

कोटा राजस्थान

शहीदों के परिजनों की सहायता को लेकर सदन में गुंजा मुद्दा

विधायक संदीप शर्मा का तारांकित प्रश्न का जवाब।


कोटा 1 मार्च।
 राजस्थान विधानसभा में विधायक संदीप शर्मा ने प्रदेश में शहीद सैनिक व अद्र् सैनिक बलों के परिजनों को दी जाने वाली सहायता और शहीदों के परिजनों को दी जाने वाली सहायता में लंबित प्रकरणों में सहायता व सुविधाओं को दिलाने की मांग की। इस पर मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा प्रदेश के शहीद हुए सैनिक व अद्र् सैनिक बलों के परिजनों को कृषि भूमि आवंटन, सम्मान भत्ता, नियोजन, शहीद का सम्मान, निशुल्क शिक्षा एवं छात्रवृति, विधुत कनेक्षन व बस पास की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। विगत तीन वर्षो में आतंकी घटनाओं दुर्घटना एवं अन्य आपदाओं में प्रदेश के 34 सैनिक शहीद हुए जिनका नाम की सूची संलग्न है और शहीदों के परिजनों को लंबित प्रकरण जिला कलेक्टर के पास लंबित है। लगभग 23 मामले
विधायक ने मंत्री जी कहा कि अधिकांश सहायता के प्रकार अटके हुए है लगभग 23 प्रकरण विचाराधीन है तथा कई जिला कलेक्टर और अन्य विभाग के अधिकारीयों के पास लंबित पडे है। सरकार और अधिकारी शहीदों की शहादत के प्रति बेपरवाह है तथा ये लंबित प्रकरण कब तक पूर्ण हो जायेगें और कोटा में सांगोद के 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में अमर शहीद हेमराज मीणा की अंत्येष्टि में पहुंचे सरकार के प्रतिनिधियों ने शहीद के परिजनों को विश्वास दिलाया था कि सांगोद चौराहे पर शहीद हेमराज मीणा की मूर्ति की स्थापना, गांव तक सड़क निर्माण करवाया और विनोद कला खुर्द स्थित विद्यालय जिसमें शहीद ने अपनी पढ़ाई की थी उसका नाम शहीद पर रख दिया जायेगा और आज पूर्ण नहीं हुआ। शहीद हेमराज मीणा के परिजनों की मांग व प्रदेश के शहीद परिवारों को कब तक सहायता सरकार द्वारा दे दी जायेगी। इस पर मंत्री महोदय ने सदन में बताया कि जब भी शहीदों के परिजनों को भूमि आवंटन करने हेतु जमीन दिखाई गयी तो उनके परिजनों को ये जमीन पसंद नही आती और कई मामलों में तो जिला कलेक्टर व राजस्व विभाग के अधिकारीयों के स्तर पर कॉरपोरेट नही किया जाता है। सरकार द्वारा 25 बीघा जमीन, 25 लाख का हाउसिंग बोर्ड का मकान या 50 लाख रुपये देने का राज्य सरकार का प्रावधान है और जिला कलेक्टर और राजस्व विभाग के अधिकारीयों द्वारा शहीदों के परिजनों को सहायता राशि व सुविधाएं दिलाने में मदद नहीं करतें।
विधायक संदीप शर्मा ने सरकार के मंत्री की बात का कडा प्रतिरोध करते हुए कहा कि अधिकारी सरकार से बडे नही होते सरकार को पाबंद करना चाहिए तथा सख्त पूर्वक निर्देश निकलना चाहिए कि तुरंत शहीदों के परिजन और वीरांगनाओं की मांग को पूरा करना चाहिए ये सरकार की जिम्मेदारी है।
सदन में प्रष्न लगाने के उपरान्त तीन बारा हंगामे की स्थिति उत्पन्न हुई विधायक संदीप शर्मा द्वारा लगाये इस प्रश्न तथा जयपुर में शहीद स्मारक पर अपनी मांगों को पूरा करने वाले शहीदों की वीरांगनाओं के समर्थन में विपक्ष द्वारा व्यवधान डाल कर सरकार का ध्यान शहीदों के परिजनों की मांगों के समर्थन में हंगामा किया।
प्रष्नकाल के उपरान्त विधायक संदीप शर्मा ने खडे हो कर कहा कि शहीदों की वीरांगनाओं धरने पर बैठी है पर सरकार उनकी कोई सुध नही ले रही है उनके साथ सांसद डॉ.किरोडी लाल मीणा भी बैठे है इस पर अन्य विधायकों ने उनका समर्थन करते हुए सरकार से मांग की शहीदों के परिजनों की मांग को पूरा किया जाये तब नेता प्रति राजेन्द्र राठौड ने उठकर इस विषय में सदन को अवगत कराया कि कोटा विधायक संदीप शर्मा के  प्रश्न के जवाब का सरकार द्वारा संतोषजनक जवाब नही दिया गया। राज्य मंत्री राजेन्द्र यादव ने कहा कि उनकी सब मांग पूरी दी गई है।  
प्रश्न के बाद सदन में शिक्षा पर चल रही बहस के दौरान  विधायक संदीप शर्मा विधानसभा के उपनेता राजेन्द्र राठौर और विधायक दल धरना स्थल पर पहुंचे जहां शहीदों की वीरांगनाओं के साथ राज्यसभा सासंद किरोडीलाल मीणा पूर्व विधायक हीरा लाल नागर शहीद स्मारक में शहीदों के परिजनों को सहायता दिलाने की मांग कर रहे थें। वहां पहुंच कर सासंद और शहीदों की विरांग्नाओं से बातचीत की और उनकी समस्या को सुना और शहीदों के परिजन शाहपुरा निवासी शहीदें रोहिताश की पत्नि मंजु लांबा , सुदंरवाली नगर निवासी शहीद जीतराम की पत्नी सुंदरी, कोटा निवासी शहीद हेमराज मीणा की पत्नि मधुबाला और असटेड कमांडर जितेंद्र सिंह की पत्नी रेणु सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा छोटे भाई को सरकारी नौकरी देगें, 25 किलोमीटर की सड़क और शहीद के नाम से शहीद स्मारक निर्माण, कॉलेज का नाम शहीद के नाम रखने, स्कुल का नाम शहीद के नाम से रखने, अदालत चौहराये पर प्रतिमा लगाने, अनुकम्पा नियुक्ति देने व अन्य कई मांगें सरकार द्वारा आज तक भी पूरी नही की गयी।
विधायक संदीप शर्मा  विधानसभा में पहुंच कर पुनः आसन से पाईट ऑफ इंफॉर्मेशन के माध्यम से अनुरोध किया कि हमारा प्रतिनिधि मंडल धरना स्थल पर वीरांगनाओं और शहीदों के परिजनों से मिल कर आया है, उनकी मांगें अभी तक पूरी नही हुई। सरकार शहीदों की शहादत का भी सम्मान नहीं कर रही है। शहीदों के परिजन परेशान हो कर धरना देना पड रहा है और अपनी जायज मांगों के लिये धरना देना पड रहा है। विधायक के साथ मदन दिलावर, अशोक लाहोटी, धर्मनारायण जोशी,सुभाष पूनिया आदि अन्य विधायक भी खडे हो गये और सदन में शहीदों को न्याय दिलाने को लेकर काफी देर तक सदन की कार्य रूकी रही। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और सदन में बैठे सभी सदस्यों ने विधायक का समर्थन किया और सदन में जोर जोर सें हंगामा प्रारम्भ हो गया। इस पर माननीय सभापति महोदय ने सदन के सदस्यों को बैठने को बोला और सदन की कार्यवाही चलने के लिये कहा। सभापति महोदय ने राजेन्द्र राठौड़ को सदन में शहीदों की मांग रखने के लिये बोला। राजेन्द्र राठौड़ ने सदन में बताया कि प्रदेष की वीरांगनाओं अपनी मांगों और राज्य सरकार द्वारा सहायता नही देने के कारण राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा जी के साथ धरना दे रही है। राठौड़ ने कहा कि सरकार गुमराह कर ही है। शहीदों की मांग को लेकर आधे घंटे चर्चा की जाना आवश्यक है। इनकी मांगों को शीघ्र पूरा किया जाये ।
    विधायक संदीप शर्मा नें बताया कि  राज्य सरकार द्वारा शहीदों के परिजनों को सरकारी सहायता नहीं दी गयी नाहि इस संबध में सरकार कोई प्रयास कर रही है। जब पुलवामा में  श्री हेमराज मीणा शहीद हुए थें तो उनकी अत्योंष्ठी में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने परिजनों विश्वास दिलाया था कि शीघ्र ही विनोद कला खुर्द का नाम शहीद पर कर देगें और सांगोद चौराहे पर शहीद की प्रतिमा लगा देगें और सरकार शहीद के परिजनों के साथ हमेशा खडी है। परन्तु 2019 से आज तक शहीद की मूर्ति चौराहे पर नही लगी नाहि स्कुल का नाम परिवर्तित हुआ है। शहीद के घर तक सडक निर्माण भी नही कराया। सरकार के जनप्रतिनिधि शहीद के परिवार को झूठा आश्वासन देकर आये है। जिस शहीदों ने अपनी जान देश के लिये बलिदान दे दी और सरकार द्वारा शहीदों के परिजनों को सहायता दिलाने की बार बार गुहार कर रहे है परन्तु आज तक इनके परिजनों को सरकारी सहायता के लिये मांग करनी पड रही है और सहायता नही मिलने के कारण परेशान होना पड़ रहा है। सरकार का ऐसा रवैया गलत है सरकार शहादत के प्रति लापरवाह है और सरकार के लिये शहादत का कोई मोल नहीं है। जिस तरह से मंत्री ये जवाब दे रहे है कि इन शहीदों के  परिवारों को सहायता कि लिये कलेक्टर इस कार्य में कॉर्पोरेट नहीं कर कर रहे ये दुर्भाग्यपूर्ण है। शहीदों का सम्मान हमारा दायित्व है और उनकी शहादत के बाद परिजनों को राहत देने के लिये सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे अधिकारीयों को पाबंद करे और सख्ती से निर्देश देकर विचाराधीन सहायता को पूर्ण कराये।
विधायक ने सरकार से मांग की इन शहीदों के परिजनों को शीघ्र सरकारी सहायता दिलाई जाए अन्यथा सरकार को इसका परिणाम भुगतना पडेगा।