धूम्रपान निगल रहा करोड़ो नोजवानो की जिंदगी

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष

धूम्रपान निगल रहा करोड़ो नोजवानो की जिंदगी

धूम्रपान करने तथा गुटका-जर्दा खाने से हो रही हैं हर साल करोड़ो जवान मौत तथा अरबो - खरबो रुपयों का आर्थिक नुकसान

आजकल के नोजवानो का धूम्रपान करने विशेषकर गुटका व जर्दा खाना फैसन बनगया है जबकि धूम्रपान करना तथा गुटखा-जर्दा खाना एक बहुत ही बुरी व खतरनाक आदत है जिसकी वजह से पूरे विश्व में हर साल करोड़ों लोगों की आकस्मिक मौत हो रही है। धूम्रपान करने तथा गुटका खाने से मुँह का कैंसर, गले का कैंसर व फेफड़ों का कैंसर तथा दमा जैसी कई गम्भीर बीमारियां होती है । एक सर्वेक्षण के मुताबिक केंसर से होनी वाली मौतों में से 50 - 60 प्रतिसत मौते केवल मुँह के कैंसर, गले के कैंसर व फेफड़ो के कैंसर के कारण होती है जिसका मुख्य कारण धूम्रपान व गुटका-जर्दा का सेवन ही है । इसके अलावा दमा से भी रोज हजारों लोग काल के मुँह में समा रहे है जिस का भी मुख्य कारण धूम्रपान ही है। धूम्रपान व गुटका का सेवन से होनी वाली मौते तो हर रोज रोड़ पर एक्सीडेंट से होनी वाली मौतों से भी ज्यादा है । धूम्रपान व गुटका-जर्दा तो कोरोना से भी भयंकर बीमारी है । कोरोना जैसी बीमारियां तो सदियों में एक दो बार आती हैं लेकिन धूम्रपान व गुटखा-जर्दा का सेवन तो लोग हर रोज कर रहे हैं और हर रोज लोग सैकड़ों की संख्या में मर रहे । इसके लिए आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस से एक विशेष अभियान चलाने की जरूरत है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सके व लोगो के जीवन को बचाया जा सके । आजकल सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है लेकिन फिर भी लोगो को कभी-कभी सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करते हुए देखा जा सकता है । आज से 20 -25 साल पहले ट्रैन के डिब्बो में व बसों में 20 से 30 लोग बीड़ी सिगरेट पीते थे और उनको 1 या 2 लोग टोकने वाले होते थे लेकिन आज सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों को नो स्मोकिंग जोन घोसित करने से ट्रेनों के डिब्बो में व बसों में 1 या 2 लोग बीड़ी सिगरेट पीने वाले होते हैं और 10- 12 लोग टोकने वाले । अब भी सरकार को इसके लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत है ताकि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्ण रूप से प्रतिबंध हो सके । आज भी हम देखते हैं बसों व ट्रेनों में लोग अभी भी धूम्रपान कर रहे हैं जो की बहुत ही खतरनाक तथा गैरकानूनी है। इससे जो लोग धूम्रपान नहीं करते उनको ज्यादा नुकसान होता है, उनके भी फेफड़े दूषित होते हैं और उनको बिना धूम्रपान किये ही परेशानी होती है ।

आजकल के युवाओं में धूम्रपान के प्रति विशेष कर सिगरेट और हुक्के के प्रति काफी लगाव देखा जा रहा है । इक्कीसवीं शताब्दी के शुरू में धूम्रपान के सेवन में कुछ कमी आई थी लेकिन अब धीरे-धीरे वापिस यह नौजवानों में ट्रेंड दिखाई दे रहा है कि स्कूल कॉलेज जाने वाले बच्चे सिगरेट पीते है और नौजवान जो या तो रोजगार की तलाश में है या नए नए रोजगार प्राप्त कर चुके हैं उनका हुक्के के प्रति विशेष लगाव देखा गया है । इसके लिए उनको यह जुनून लगता है कि इससे लोगों में उनकी खास पैठ बढ़ेगी जबकि हकीकत तो यह है कि वे अपना नुकसान तो कर ही रहे हैं और अपने परिवार का तथा आसपास के लोगों का भी नुकसान कर रहे हैं । इसके लिए उनको यह बताने की और समझाने की जरूरत है कि यह उनके लिए भी और आनी वाली पीढ़ियों के भी बहुत घातक है ।

नवलगढ़ निवासी और मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉक्टर अनिल सांगानेरिया की पिछले साल चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि आजकल स्कूल व कॉलेजों में 10% से अधिक छात्र धूम्रपान करते हैं । असल मे धूम्रपान करने वाले तथा गुटखा - जर्दा खाने वाले बच्चों की संख्या इससे भी कही ज्यादा है । पिछले कई सालों से लगातार धूम्रपान करने वाले व गुटखा-जर्दा खाने वाले लोगो मे 10 में से 5-6 लोगो को कैंसर का रोग पाया गया है । ज्यादातर धूम्रपान तथा गुटखा-जर्दा की लत बच्चों में घर से ही शुरू होती है । जिस घर में बड़े या बूढ़े बुजुर्ग धूम्रपान करते हैं या गुटके-जर्दे का सेवन करते हैं उनके बच्चों में ये आदत ज्यादा पाई जाती है क्योंकि वो बड़ो को देख कर घर मे छुपकर धूम्रपान करते है तथा गुटके- जर्दे का भी सेवन करते हैं क्योकी उनको यह आसानी से घर मे ही मिल जाता है और धीरे धीरे उनको इसकी आदत लग जाती है । कुछ बच्चे स्कूल या कॉलेज में अपने से बड़े बच्चों को देखकर धूम्रपान करना शुरू कर देते हैं या कुछ बड़े बच्चे छोटे बच्चों पर इसके लिए दबाव बनाते क्योको वो इसको को एक स्टेटस सिम्बल के रूप में देखते हैं।

आजकल सिगरेट की आदत महिलाओं में भी तेजी से पैर पसार रही है खासकर शहरी इलाकों में। मेट्रोपॉलिटन सिटी में तो महिलाएं बड़े बड़े कलबो में धूम्रपान करती हुई रोज देखी जा सकती है। भारत में एक लाख से भी ज्यादा महिलाएं धूम्रपान करती हैं जो एक बहुत ही चिंता का विषय है

आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर हम सब मिलकर( खासकर जो धूम्रपान नही करते हैं व गुटखा नही खाते हैं) ये अभियान चलाए कि हम कम से कम एक आदमी को धूम्रपान करने व गुटका-जर्दा खाने से बचाएंगे । यदि हर आदमी गंभीरता से इस अभियान को आगे बढ़ाए तो बहुत जल्द हमारा देश नहीं पूरा विश्व इस धूम्रपान करने व गुटखा खाने से मुक्त हो सकता है। इससे हमें तो फायदा है ही है पर्यावरण को भी बहुत बड़ा फायदा होता है।

संकलनकर्ता
राजस्थान प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति सचिव व समाजसेवक कैप्टन राम निवास ताखर, दलेलपुरा (झुन्झुनू)